, April 9 -- स्नातकोत्तर संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत झा की अध्यक्षता में आयोजित व्याख्यान में मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. पुनिता झा ने कहा कि प्राच्य विद्याओं में भारतीय पारंगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सभी विधाएं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हैं, जिनसे प्रभावित होकर विदेशी लोग भी नतमस्तक हो जाते हैं। छात्र संस्कृत एवं ज्योतिषीय ज्ञान का जीवन में उपयोग कर लाभ उठाएं।

दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ शिवानन्द झा ने कहा कि ज्योतिष हमारे व्यावहारिक जीवन से जुड़ा हुआ शास्त्र है। 'समय का विज्ञान' कहलाने वाला ज्योतिष का छात्र अपने जीवन में सदुपयोग कर लाभ उठा सकते हैं।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ कृष्णकांत झा ने कहा कि ज्योतिषशास्त्र हमारी प्राचीन विरासत है, जिसमें काल गणना प्रमुख है। ज्योतिष से भविष्य की संभावनाओं की जानकारी मिलने से मन को स्थिर कर चुनौतियों का सामना अधिक विवेक से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे सभी पर्व-त्यौहार हिन्दी मास- चैत से फागुन के अनुसार ही होते हैं। अंग्रेजी गणना बहुत बाद में आयी है, जिसकी उपयोगिता भी कम है। डॉ. ममता स्नेही, डॉ. मोना शर्मा एवं रीतु कुमारी आदि ने भी ज्योतिष के व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ज्योतिष ज्ञान अथाह समुद्र जैसा है।

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