पटना , जून 15 -- ित्तीय समावेशन के मामले में बिहार पूरे देश भर में दूसरा सबसे बड़ा योगदान करने वाला बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाइ) के तहत राज्य में जमा राशि 30,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खातों के बढ़ते उपयोग और बचत की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में 6.87 करोड़ जन धन खाते हैं, जिससे बिहार देश में दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश है, जहां 10.32 करोड़ खातों में लगभग 64,000 करोड़ रुपये जमा हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर अप्रैल 2026 तक पीएमजेडीवाइ के तहत कुल जमा राशि 3.09 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुकी है, जबकि कुल खातों की संख्या 58.06 करोड़ हो गई है। यह दर्शाता है कि अब ये खाते केवल शून्य-बैलेंस खाते नहीं रह गए हैं, बल्कि सक्रिय बचत खातों में बदल रहे हैं।

बीएलएस ई-सर्विसेज लिमिटेड की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (बीसी) नेटवर्क इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये नेटवर्क बैंकिंग सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाकर वित्तीय समावेशन को मजबूत कर रहे हैं।

बिहार में बीसी एजेंट घर-घर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, जिनमें जमा, निकासी और धन प्रेषण (रिमिटेंस) जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इससे लोगों की बैंक शाखाओं पर निर्भरता कम हुई है। इस मॉडल ने निष्क्रिय खातों को सक्रिय करने और विशेष रूप से ग्रामीण जिलों में नियमित बचत को बढ़ावा देने में मदद की है। बीएलएस ई-सर्विसेज लिमिटेड के मुख्य परिचालन अधिकारी लोकनाथ पांडा ने बताया कि बिहार में खातों की गतिविधियों में लगातार वृद्धि हो रही है। ग्राहक बचत और लेन-देन के लिए औपचारिक बैंकिंग माध्यमों का अधिक उपयोग कर रहे हैं। खातों में बढ़ती जमा राशि जमीनी स्तर पर वित्तीय जागरुकता और बैंकिंग व्यवस्था के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

वित्तीय समावेशन में पश्चिम बंगाल भी लगभग 30,000 करोड़ रुपये जमा राशि और 5.64 करोड़ खातों के साथ बिहार के बराबर है। इसके बाद राजस्थान में 24,000 करोड़, महाराष्ट्र में 22,000 करोड़ और मध्य प्रदेश में 19,000 करोड़ रुपये जमा हैं। कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और गुजरात में 13,000-15,000 करोड़ रुपये के बीच जमा राशि दर्ज की गई है, जो विभिन्न राज्यों में व्यापक वृद्धि को दर्शाती है।

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