, March 27 -- मुखिया अमित सिंह ने बताया कि प्लास्टिक बोतल 15 रुपये प्रति किलोग्राम, काला प्लास्टिक दो रुपये प्रति किलोग्राम, सफेद मिक्स प्लास्टिक पांच रुपये प्रति किलोग्राम और टीन 10 रुपये प्रति किलोग्राम खरीदा जाता है। अबतक डेमो प्रोजेक्ट सफल रहा है, आने वाले दिनों में 40 किलो रिसाइकल प्लास्टिक से तीन फीट का वॉश बेसिन, 75 किलो से पार्क बेंच, 35 किलो से 16 इंच का डस्टबिन, फेंस, स्कूल बेंच, फ्लावर पॉट, अलमारी, पोर्टेबल टॉयलेट आदि का निर्माण किया जाएगा। इन सामानों की गारंटी लगभग 15 साल होगी।
श्री सिंह ने बताया कि लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरणा मिली। परिवार के सदस्यों ने मिलकर इस मुहीम को आकार दिया, बड़े बेटे ने मार्केटिंग और बिजनेस डेवलपमेंट संभाला, छोटे ने ऐप बनाया। वर्तमान में अकेले सिवान जिले में प्रति महीने लगभग सवा टन रिसाइकल योग्य कचरे का उठाव हो रहा है। पंचायत खुले में कचरा फेंकने से मुक्त हो चुकी है। खाद्य कचरे से खाद बनाई जा रही है। इसमें 22 लोगों की टीम काम कर रही है, जिन्हें 12 हजार से ज्यादा सैलरी, मेडिकल सुविधा और सात लाख का बीमा सुविधा प्रदान की गई है।
इस अनोखे स्टार्टअप ने हरिद्वार, पंजाब और कोका-कोला(बनारस) जैसे संगठनों से टाई-अप किया है, जहां रिसाइकल प्लास्टिक सप्लाई की जा रही है। शादी-विवाह जैसे मौकों पर निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को भी प्रोसेस किया जा रहा है। आने वाले समय में प्लास्टिक कचरे को सड़क निर्माण में इस्तेमाल के लिए बेचा जाएगा, जिससे और अधिक लोगों को कमाई का अवसर मिलेगा। यह मॉडल ग्रामीण भारत के लिए एक मिसाल बन रहा है, जहां कचरा रोजगार का जरिया बन गया है।
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