, July 26 -- प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात कार्यक्रम में सीतामढी के पहल पर विस्तार से प्रकाश डाला गया एवं इसे पूरे देश भर के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि "कम उपयोग करें, पुनः उपयोग करें एवं पुनर्चक्रण करें (रिड्यूश, रीयूज एवं रिसायकल)" अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि जन-जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है, सीतामढ़ी की यह पहल इसी सोच को व्यवहार में उतारने का उत्कृष्ट उदाहरण है। ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि "मन की बात' में इस पहल का उल्लेख होना बिहार, सीतामढ़ी तथा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) / लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के मिशन निदेशक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी जीविका हिमांशु शर्मा ने कहा कि राज्य में ग्रामीण स्वच्छता के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय कार्य हो रहे है। विशेष रूप से "कचरा से संसाधन" (वेस्ट टू वेल्थ) पहल अंतर्गत कचरा को उपयोगी समाग्री में बदलने की दिशा में नई नवाचारी पहल किये जा रहे हैं। सीतामढी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलने से अन्य 'वेस्ट टू वेल्थ' पहलों को उत्साह मिला है।
इस अभिनव पहल में वेस्ट टू वेल्थ उद्यम 'राय इंडस्ट्रीज़' की महत्वपूर्ण भूमिका है। सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने राय इंडस्ट्रीज़ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) कर इस मॉडल को सफलतापूर्वक विकसित एवं क्रियान्वित किया है।
सीतामढ़ी जिला प्रशासन ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के तहत एकल उपयोग प्लास्टिक जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौती का स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान पर रणनीति बनाकर कार्य किया। इसके तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल अपनाया गया। सीतामढ़ी में इस मॉडल को विकसित करने के लिए जिला जल एवं स्वच्छता समिति ने निजी उद्यम राय इंडस्ट्रीज़ के साथ फरवरी 2026 में समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया। इसके बाद बाजपट्टी, रुन्नीसैदपुर, डुमरा एवं रीगा प्रखंडों में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अंतर्गत निर्मित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन केन्द्रों का संचालन पीपीपी मॉडल के तहत प्रारंभ किया गया। इन केन्द्रों पर संग्रहित एकल उपयोग वाले प्लास्टिक अपशिष्ट को पुनर्चक्रित कर प्लास्टिक स्लैब तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे विद्यालयों एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग के लिए टिकाऊ, मजबूत एवं पर्यावरण-अनुकूल फर्नीचर निर्मित किया जा रहा है। यह फर्नीचर लकड़ी के फर्नीचर से कई गुना मजबूत हैं । टिकाउ एवं सस्ते भी है।यह पहल आज प्लास्टिक अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन भी प्रेरणादायी उदाहरण बन चुकी है।
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