, March 20 -- यही खाद आज 'शक्तिमान' ब्रांड के नाम से जानी जाती है। गुणवत्ता परीक्षण में मानकों पर खरी उतरने के बाद इसे स्थानीय किसानों के बीच सात रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक करीब 1500 किलोग्राम जैविक खाद तैयार की जा चुकी है। इस पहल से पंचायत को अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है, वहीं किसानों को सस्ती और बेहतर जैविक खाद उपलब्ध हो रही है।रामपुर के किसान अब धीरे-धीरे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम कर रहे हैं। 'शक्तिमान' खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ रही है और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार देखा जा रहा है। यह बदलाव न सिर्फ खेती को टिकाऊ बना रहा है, बल्कि किसानों की लागत भी कम कर रहा है।

इस पूरे अभियान में जनजागरूकता की भूमिका भी बेहद अहम रही। पंचायत स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान चलाए गए, जिनमें खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को शामिल किया गया। उन्हें स्वच्छता, कचरा पृथक्करण और जैविक खाद के फायदे के बारे में बताया गया। इसका असर यह हुआ कि अब अधिकांश घरों में कचरे को अलग-अलग कर स्वच्छताकर्मियों को सौंपा जाता है।

आज रामपुर पंचायत की गलियां साफ-सुथरी हैं, कचरे के ढेर गायब हो चुके हैं और लोगों में स्वच्छता को लेकर नई चेतना जागी है। इसके साथ ही इस पहल ने गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। स्वच्छताकर्मी और प्रसंस्करण इकाई से जुड़े श्रमिकों को नियमित काम मिल रहा है।

रामपुर की यह कहानी सिर्फ एक पंचायत की नहीं, बल्कि उस बदलाव की कहानी है, जो सामुदायिक सहभागिता, जागरूकता और सही योजना से संभव हो सकता है। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां जो मॉडल विकसित हुआ है, वह पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बन चुका है।

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