, Oct. 31 -- मुख्य वक्ता यूजीसी, नई दिल्ली के सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव प्रो. जीएस चौहान ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, कृषि कार्यों में बढ़ती बाधाएं तथा किसानों की स्थिति में सुधार भूगोलवेत्ताओं के समक्ष बड़ी चुनौतियां हैं। इन समस्याओं का समाधान कर ही विकसित भारत-2047 का सपना साकार किया जा सकता है।की-नोट वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं पूर्व भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. साहब फजल ने कहा कि सतत एवं सामूहिक विकास से ही स्थायी प्रसन्नता और समृद्धि संभव है। कृषि के बहुआयामी विकास से विकसित भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने देश में युवाओं की बड़ी आबादी को महत्वपूर्ण संसाधन बताते हुए कहा कि सही कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ने से विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
संघ के संरक्षक एवं पटना विश्वविद्यालय के प्रो. रास बिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र बनाना हमारा अंतिम लक्ष्य है। उन्होंने सम्मेलन को पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक बताते हुए कहा कि इस संघ का पहला सम्मेलन डॉ. अनुरंजन के पिता ने पटना विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष रहते हुए संयोजक के रूप में आयोजित किया था। अब 27वें सम्मेलन का आयोजन उनके पुत्र एवं एलएनएमयू के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. अनुरंजन के संयोजकत्व में हो रहा है।
पटना विश्वविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष एवं संघ के महासचिव प्रो. मनोज कुमार सिन्हा ने संघ की गतिविधियों एवं कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि इसके 1600 से अधिक आजीवन सदस्य हैं। उन्होंने संघ का वार्षिक प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया।
सम्मेलन के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनुरंजन ने बताया कि भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सौजन्य से आयोजित यह सम्मेलन हाइब्रिड मोड में हो रहा है। इसमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों के 500 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन में कुल 35 समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। उद्घाटन सत्र के बाद दो पैनल सत्र तथा संघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक भी निर्धारित है। सम्मेलन का समापन रविवार को होगा।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, बिहार गीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया। अतिथियों के साथ विभाग के पूर्व अध्यक्षों एवं विशिष्ट भूगोलवेत्ताओं को पाग, चादर, स्मृति चिह्न एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका, संघ की ओर से प्रकाशित शोध पत्रिका, वर्ष 2025 में आयोजित 26वें सम्मेलन की दो खंडों में प्रकाशित सारांश रिपोर्ट, विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की 'जियोविजन' पत्रिका के तीन संस्करणों तथा डॉ. शैलेन्द्र कुमार की पुस्तक सहित अन्य पुस्तक का विमोचन किया गया। विगत एक वर्ष में दिवंगत भूगोलवेत्ता प्रो. जीपी झा एवं प्रो. विद्यासागर यादव के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रश्मि शिखा एवं डॉ. रानी सिंह ने संयुक्त रूप से किया। स्वागत भाषण डॉ. अनुरंजन तथा धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. सुनील कुमार सिंह ने किया। सम्मेलन में संघ के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप सिंह, प्रो. राणा प्रताप, डॉ. मनुराज शर्मा सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी एवं भूगोलवेत्ता उपस्थित थे।
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