, March 16 -- इस तकनीक के कारण बच्ची को बड़े ऑपरेशन से होने वाले दर्द से बचाया जा सका और उसकी रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेजी से हुई।भारत और दुनिया के कुछ ही उन्नत चिकित्सा केंद्रों में छोटे बच्चों में इस प्रकार की थोराकोस्कोपिक ट्यूमर सर्जरी की जाती है क्योंकि यह तकनीकी रूप से काफी जटिल होती है और इसके लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।
एम्स पटना में इस सर्जरी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि अब यहां भी जटिल और अत्याधुनिक चिकित्सा प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की जा रही हैं।इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पीडियाट्रिक सर्जरी टीम में डॉ. अमित कुमार सिन्हा, डॉ. सौरव श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार, डॉ. राशि, डॉ. दिगंबर चौबे और डॉ. गौरव शांडिल्य शामिल थे जिन्होंने बेहतरीन टीमवर्क और विशेषज्ञता का परिचय दिया।सर्जरी की सफलता में पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इस टीम का नेतृत्व डॉ. चांदनी ने किया। उन्होंने अत्याधुनिक ब्रोंकियल ब्लॉकर तकनीक के माध्यम से सिंगल-लंग वेंटिलेशन दिया जो इतने छोटे बच्चे में करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।ऑपरेशन के बाद बच्ची की स्थिति तेजी से बेहतर हुई। उसे ऑपरेशन थिएटर में ही एक्सट्यूबेट कर दिया गया और चिकित्सकों की निगरानी में उसकी रिकवरी अच्छी रही। कुछ समय बाद ही बच्ची को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई जिससे उसके परिवार को बड़ी राहत मिली।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर पूरी मेडिकल टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान का लक्ष्य मरीजों विशेषकर बच्चों को आधुनिक, सुरक्षित और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि मिनिमली इनवेसिव तकनीकों के बढ़ते उपयोग से मरीजों को कम दर्द, कम समय में रिकवरी और बेहतर इलाज मिल रहा है।यह उपलब्धि न केवल एम्स पटना के लिए गर्व का विषय है बल्कि बिहार और पूर्वी भारत के लोगों के लिए एक भरोसे का संदेश भी है कि अब उन्नत और विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उनके अपने राज्य में ही उपलब्ध है।
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