, July 21 -- अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि कुपोषण जैसी चुनौती का समाधान केवल स्वास्थ्य संस्थानों के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए शोध संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, नीति निर्माताओं और विकास सहयोगियों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। यूनिसेफ बिहार के न्यूट्रिशन स्पेशलिस्ट डॉ. अंतर्यामी दास ने कहा कि पोषण के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए शोध, क्षमता निर्माण और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस दिशा में यूनिसेफ की निरंतर साझेदारी का भरोसा दिलाया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पोषण अनुसंधान की कार्यप्रणाली, अध्ययन की रूपरेखा, डेटा विश्लेषण, वैज्ञानिक लेखन तथा शोध के निष्कर्षों को नीति निर्माण में उपयोग करने जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साझा मंच पर लाकर सहयोग, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देगा।

'नर्चर' प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत एम्स पटना की उस निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत संस्थान चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह पहल देश में पोषण अनुसंधान को सशक्त बनाने और स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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