, May 12 -- मुख्य अतिथि पारस नाथ सिंह ने आधुनिक अपराध अनुसंधान में तकनीक की भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने मेडिको लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्ट मॉर्टम रिपोर्टिंग सिस्टम) के उपयोग को बढ़ावा देते हुए कहा कि डिजिटल पोस्टमॉर्टम रिपोर्टिंग न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और सटीक बनाएगी। कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रो. (डॉ.) बिनय कुमार, डॉ. इंदिरा प्रसाद एवं प्रो. (डॉ.) त्रिभुवन कुमार द्वारा लिखित पुस्तक "मेडिकोलीगल आस्पेक्ट्स ऑफ असिस्टेड रीप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी- इंडियन पर्सपेक्टिव" का लोकार्पण रहा। आधुनिक चिकित्सा न्यायशास्त्र के जटिल विषयों पर आधारित इस पुस्तक को विशेषज्ञों ने वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। एम्स देवघर के प्रो. (डॉ.) निशात अहमद शेख एवं सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश किशोर प्रसाद ने न्यायालय में विशेषज्ञ गवाही, अदालत की प्रक्रियाओं और पेशेवर आचरण के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की।
विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) पटना के निदेशक हिमजय कुमार ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और नमूना संग्रहण की महत्ता पर प्रकाश डाला,जबकि सिटी एसपी (वेस्ट) भानु प्रताप सिंह ने ई-साक्ष्य पोर्टल और अपराध स्थल जांच की आधुनिक तकनीकों पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
वहीं डॉ. चैतन्य मित्तल द्वारा ऑटोप्सी प्रक्रिया का वीडियो प्रदर्शन किया गया जिसने सभी को फोरेंसिक जांच की जमीनी वास्तविकताओं और वैज्ञानिक सूक्ष्मताओं से परिचित कराया। इसके बाद आयोजित इंटरैक्टिव पैनल चर्चा में पुलिस अधिकारियों, फोरेंसिक वैज्ञानिकों और मेडिकल रेजिडेंट्स ने सक्रिय भागीदारी करते हुए न्याय प्रणाली को और प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि विज्ञान, चिकित्सा और कानून के बीच सहयोग को और मजबूत बनाकर एक अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और सशक्त न्याय व्यवस्था की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
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