, March 15 -- कार्यक्रम में आईएपी सचिव डॉ.अमित कुमार और कोषाध्यक्ष डॉ. बिनय रंजन की भी उपस्थिति रही।
इस प्रशिक्षण में 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिनमें पोस्टग्रेजुएट पीडियाट्रिशियन, नियोनेटोलॉजिस्ट और स्टाफ नर्स शामिल थे। प्रतिभागियों को आधुनिक सिमुलेशन मॉडल्स के माध्यम से नवजात शिशुओं के पुनर्जीवन की प्रक्रियाओं का व्यावहारिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण दिया गया जिससे वे वास्तविक परिस्थितियों में तुरंत और प्रभावी निर्णय ले सकें।
कार्यक्रम में प्रशिक्षण का नेतृत्व लीड इंस्ट्रक्टर डॉ.जगदीश प्रसाद साहू ने किया। उनके साथ डॉ. भवेश कांत, डॉ. रमेश्वर प्रसाद, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. केशव पाठक, डॉ. रिची दलई, डॉ. मेघना नेमा और डॉ. बिनय रंजन ने प्रतिभागियों को विभिन्न आपात स्थितियों में नवजात शिशुओं के उपचार की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषता रही "गोल्डन मिनट" की अवधारणा पर विशेष प्रशिक्षण। विशेषज्ञों ने बताया कि जन्म के पहले ही मिनट में अगर नवजात शिशु का सही तरीके से रिससिटेशन शुरू किया जाए तो उसके स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यह पहल भविष्य में नवजात मृत्यु दर को कम करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
एम्स पटना में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि बेहतर कौशल, सही समय पर कार्रवाई और आधुनिक चिकित्सा प्रशिक्षण के माध्यम से नन्हीं जिंदगियों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है। ऐसे प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाते हैं तथा समाज को स्वस्थ आने वाली पीढ़ी की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
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