, Aug. 12 -- यह पहल एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगे.) डॉ. राजू अग्रवाल के सहयोग और प्रोत्साहन से आयोजित की जा रही है। संस्थान में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के साथ साथ आधुनिक गुणवत्ता प्रणालियों और कर्मचारियों की क्षमता निर्माण को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।कार्यक्रम के दौरान डीन अकादमिक प्रो. पूनम प्रसाद भदानी और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. प्रशांत कुमार सिंह भी उपस्थित रहे और उन्होंने इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण पहल को अपना समर्थन दिया।
कार्यक्रम बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. साधना शर्मा की पहल पर आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का संचालन मेडिकल एडुकेशन एंड लर्निंग प्वाइंट, दिल्ली के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा किया जा रहा है जिसका नेतृत्व डॉ. नीरज जैन कर रहे हैं।
प्रशिक्षण में केवल नियमों और मानकों की जानकारी नहीं दी जा रही बल्कि इंटरैक्टिव सत्रों, व्यावहारिक उदाहरणों और वास्तविक प्रयोगशाला परिस्थितियों के माध्यम से यह समझाया जा रहा है कि आइएसओ 15189 के मानकों को रोजमर्रा के काम में कैसे लागू किया जा सकता है।
प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि सैंपल लेने, उसे सुरक्षित रखने, जांच करने, परिणाम दर्ज करने, रिपोर्ट तैयार करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तक पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता बनी रहे।
प्रतिभागियों को संभावित कमियों और जोखिमों की पहचान करने तथा उन्हें समय रहते दूर करने के व्यावहारिक उपाय भी बताए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित, तेज और विश्वसनीय बनाना है।
इस मौके पर डॉ. साधना शर्मा ने कहा कि प्रयोगशाला जांच किसी भी मरीज के उपचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए जांच की गुणवत्ता केवल लैब की जिम्मेदारी नहीं बल्कि मरीज की सुरक्षा और बेहतर उपचार से सीधे जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि सैंपल से लेकर अंतिम रिपोर्ट तक प्रत्येक चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है।
एम्स पटना में चल रहा यह कार्यक्रम संस्थान की मरीज केंद्रित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रशिक्षण से लैब कर्मियों की तकनीकी एवं प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने और डायग्नोस्टिक सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने की उम्मीद है।
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