, May 20 -- श्री लोढ़ा ने बताया कि इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई तकनिकों को भी नेक्सट जेनरेशन इमर्जेंसी रिस्पांस स्पोर्ट सिस्टम (एनजीईआरएसएस) में समाहित करने की कवायद तेजी से चल रही है। इसमें जीआईएस मैपिंग, विश्लेषण रिपोर्ट, पैट्रोलिंग मैनेजमेंट सिस्टम, सोशल मीडिया, फीडबैक मैकेनिज्म जैसी अन्य सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इससे सीसीटीएनएस, रेलवे, एनएचएआई, पथ परिवहन विभाग समेत अन्य आपातकालीन सेवाओं को भी जोड़ दिया जाएगा। एडीजी ने कहा कि डॉयल-112 पर रोजाना औसतन 6500 कॉल आते हैं, जिनके माध्यम से नागरिकों को सेवाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि छह जुलाई 2022 से शुरू हुई इस सेवा में अब तक 55 लाख से अधिक लोगों को सेवाएं दी जा चुकी हैं। इसमें घरेलू हिंसा, महिला अपराध और बच्चों से जुड़े चार लाख 69 हजार 347 से अधिक मामलों में तुरंत सहायता दी गई है। स्थानीय विवाद, मारपीट और हिंसात्मक झड़प में 29 लाख 97 हजार 411 से अधिक मामले, अगलगी के एक लाख 30 हजार 394 से अधिक मामलों में घटनास्थल पर तुरंत फायर ब्रिगेड की टीम भेजकर जानमाल की सुरक्षा की गई और सड़क दुर्घटना के दो लाख 39 हजार 339 से अधिक मामलों में घायलों को तुरंत मदद पहुंचाकर जान बचाई गई है।
श्री लोढ़ा ने कहा कि राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में हत्या के मामलों में 22 फीसदी, लूट में 38 फीसदी और महिलाओं के खिलाफ अपराध में करीब 21 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इसमें डॉयल-112 की भूमिका भी बेहद अहम है। वर्तमान में इस आपातकालीन सेवा में 1833 वाहन हैं, जिसमें 1283 चार पहिया और 550 दो पहिया वाहन शामिल हैं।
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