, May 28 -- पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता युग में राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ के लिए श्रृंगी ऋषि को इसी स्थान से अयोध्या आमंत्रित किया था। इसके बाद भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के जन्म की कथा भी इससे जुड़ी मानी जाती है। यह भी कहा जाता है कि राजपरिवार के चारों पुत्रों का मुंडन संस्कार ऋषिकुंड में ही संपन्न हुआ था। मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी बाजार और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं।

ऋषिकुंड विकास मंच के संयोजक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एक माह तक चलने वाले इस मलमास मेले में देशभर से लोग पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं।

वहीं बिहार के विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं ने भी मेले को लेकर अपने अनुभव साझा किए और इसे आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित