, June 10 -- प्रो. रहमान ने सहानुभूति को स्वस्थ सामाजिक एवं पारिवारिक संबंधों का आधार बताते हुए कहा कि दूसरों की भावनाओं और दृष्टिकोण को समझना सामाजिक सामंजस्य को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि समस्याओं से घबराने के बजाय उन्हें छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर तार्किक समाधान खोजने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी प्राथमिकताओं को समझकर सोच-समझकर निर्णय लेने से जीवन में चिंता और पछतावे की संभावना कम हो जाती है।कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. ध्रुव कुमार ने कहा कि प्रभावी संचार और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखना जीवन की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं। नियमित रूप से कम-से-कम 30 मिनट व्यायाम या सैर तथा 7-8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है।

संगोष्ठी में विभाग के प्राध्यापक डॉ. मोहम्मद जिया हैदर, अमृत कुमार झा, डॉ. दिवेश कुमार शर्मा, डॉ. आई. के. रॉय तथा डॉ. निशात शाहीन ने भी अपने विचार व्यक्त किए और जीवन-कौशल के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शोधार्थी, शिक्षक एवं शिक्षाविद् उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निशात शाहीन ने किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी ने प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ जीवन-कौशलों को व्यवहार में अपनाने की प्रेरणा प्रदान की।

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