, March 31 -- राज्य सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि गरीब और असहाय लोग अक्सर जीविकोपार्जन के लिए सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करते हैं। इसलिए वेंडिंग जोन या वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना अतिक्रमण हटाने से उनके रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करें।पत्र में यह भी कहा गया है कि हालांकि जिलाधिकारी द्वारा अतिक्रमण हटाना विधिसम्मत है, लेकिन यह न्यायोचित नहीं माना गया है क्योंकि वे इस अधिनियम के तहत अपीलीय प्राधिकारी होते हैं। ऐसे में अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अनुमंडल पदाधिकारी स्तर के अधिकारियों को ही इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं।
अतिक्रमण हटाने को शहरी सौंदर्यीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए सरकार ने इसके लिए वित्तीय आवंटन भी जारी किया है। हाल ही में जारी पत्रों के माध्यम से विभिन्न जिलों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे अतिक्रमण वादों की सूची तैयार करें और उनका विधिवत संधारण करें। प्रत्येक मामले में नोटिस, तामिला और कार्रवाई की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट उल्लेख होना अनिवार्य होगा।
उप मुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य में शहरी सौंदर्यीकरण और सुव्यवस्थित विकास के लिए अतिक्रमण हटाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों को अतिक्रमण मुक्त कर ही हम बेहतर यातायात, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को सुनिश्चित कर सकते हैं।हालांकि, सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। गरीब एवं असहाय लोगों के जीवनयापन को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि उनका अतिक्रमण तभी हटाया जाए, जब उनके लिए रोजगार के वैकल्पिक साधन या पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कर दी जाए।
श्री सिन्हा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ विकास को आगे बढ़ाना है, जिससे किसी भी जरूरतमंद की आजीविका प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकताओं में मुख्य धारा से पीछे छूटी हुई आबादी है। उनको मुख्य धारा से जोड़ने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
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