खड़गवां/एमसीबी , मार्च 19 -- छत्तीसगढ के खड़गवां विकासखंड अंतर्गत खड़गवां गांव की रहने वाली लीलावती ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में सीमित संसाधनों में जीवन बसर करने वाली लीलावती आज बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह से जुड़कर एक सफल उद्यमी बन चुकी हैं और कई महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हैं।

जिला जन संपर्क अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि लीलावती के पति गजराज सिंह नेटी पेंटिंग का काम करते हैं। उनकी मासिक आय 30 से 40 हजार रुपए के बीच थी लेकिन सीमित आय में परिवार की जरूरतों को पूरा करना काफी मुश्किल होता था। आर्थिक तंगी के बावजूद लीलावती ने हिम्मत नहीं हारी। उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई जब गांव में सीआरपी दीदी के माध्यम से स्व-सहायता समूह का गठन हुआ।

उनके मार्गदर्शन में लीलावती 'गुलाबी स्व सहायता समूह' से जुड़ गईं, जो कल्पना महिला संकुल संगठन बरदर के अंतर्गत काम करता है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बैंक लिंकेज के माध्यम से 40 हजार रुपए की पहली आर्थिक सहायता मिली। इस राशि से लीलावती ने चार बकरियां खरीदकर बकरी पालन का काम शुरू किया। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने जल्द ही बकरियों की संख्या बढ़ाकर आठ कर ली।

इसके बाद लीलावती ने बैंक लिंकेज से मिक्सचर मशीन भी खरीदी, जिससे उनकी आमदनी में काफी इजाफा हुआ। आज वह प्रतिवर्ष करीब एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो चुका है और वह आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर रही हैं।

लीलावती की सफलता में नियमित समूह बैठकों में भागीदारी, वीओ स्तर पर सक्रियता और बिहान कार्यालय से मिले मार्गदर्शन का अहम योगदान रहा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर महिलाओं को सही अवसर और सहयोग मिले, तो वे न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि समाज के लिए भी मिसाल बन सकती हैं।

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