बिलासपुर , अक्टूबर 22 -- छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े दुर्गोत्सव के समापन पर बिलासपुर में बुधवार शाम से गुरुवार सुबह तक भव्य झांकियों के साथ दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला चलता रहा।
जिले में आकर्षक रोशनी, डीजे, धुमाल और ढोल-ताशों की गूंज के बीच निकलीं झांकियों में भगवान जगन्नाथ स्वामी, खाटू श्याम का दरबार, लड्डू गोपाल, भगवान शिव की जटाओं से निकलती गंगा मैया और श्रवण कुमार की झांकी ने लोगों का ध्यान खींचा। भगवान शिव की बारात में ब्रह्मा, विष्णु और भूतों को नृत्य करते हुए दिखाया गया। झांकियों को देखने के लिए शहर में बड़ी संख्या में लोग जुटे और कई मार्गों पर 3 से 5 किलोमीटर तक जाम जैसी स्थिति बनी रही।
दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कल शाम शुरू हुआ, जो आज सुबह सात बजे तक जारी रहा। शहर के विभिन्न इलाकों से दुर्गा समितियां सुसज्जित झांकियों के साथ निकलीं। देवकीनंदन चौक, सिम्स चौक और हटरी चौक से गुजरते हुए झांकियां पचरीघाट पहुंचीं। इस दौरान जगह-जगह सामाजिक संगठनों और विभिन्न समाजों ने मंच बनाकर समितियों का स्वागत किया। छठघाट पर भी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
बिलासपुर में दुर्गा प्रतिमा स्थापना की परंपरा 75 साल से चली आ रही है। नौ दिनों तक शहर के विभिन्न पंडालों में श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना की। दशहरे के दूसरे दिन बुधवार को भक्तों ने नम आंखों से माता को विदाई दी। वहीं, आकर्षक झांकियों के साथ प्रतिमा विसर्जन की परंपरा 48 साल पुरानी है। इसी परंपरा के तहत दुर्गा समितियों ने इस बार भी भव्य आयोजन किया।
झांकियों की भव्यता बढ़ाने के लिए जबलपुर, राजनांदगांव और गोंदिया से विशेष झांकियां मंगाई गई थीं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे धुमाल और बैंड दलों की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते प्रतिमाओं के साथ आगे बढ़ते रहे। शहर के अलावा आसपास के गांवों तथा रायपुर, कोरबा, मुंगेली और जांजगीर-चांपा से भी लोग झांकियां देखने पहुंचे।
मध्य नगरी दुर्गोत्सव समिति ने अपने 50वें साल को खास बनाने के लिए माता के आगमन से लेकर विदाई तक विशेष इंतजाम किए थे। समिति की शिव-सती झांकी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें माता के 51 स्वरूपों को प्रदर्शित किया गया। समिति के सदस्यों के मुताबिक, यह झांकी राजनांदगांव से मंगाई गई थी।
इसके अलावा गोंदिया से मां गंगा के उद्गम को दर्शाती भागीरथी की झांकी लाई गई थी। युवाओं को माता-पिता की सेवा के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से श्रवण कुमार की झांकी भी निकाली गई। झांकियों में भगवान हनुमान को लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाने पहाड़ उठाकर ले जाते हुए दिखाया गया। भूतिया डांस, भगवान शंकर की बारात, खाटू श्याम का दरबार और शिव की जटाओं से निकलती गंगा मैया के दृश्य भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
दुर्गोत्सव के समापन पर बंगाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता को विदाई दी। विनोबा नगर, तोरवा सहित अन्य स्थानों के मंदिरों और बंगाली पंडालों में महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सिंदूर खेला की रस्म निभाई।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित