बिलासपुर , जुलाई 07 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिलासपुर जिले में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो पुत्रों की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) से जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस घटना से संबंधित मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक तथा ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह जानकारी आज अधिवक्ताओं के माध्यम से प्राप्त हुई।
अदालत ने निर्देश दिया है कि राज्य में विद्युत अधोसंरचना के निरीक्षण और रखरखाव की वर्तमान व्यवस्था, दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अपनाए जा रहे सुरक्षा उपाय तथा लापरवाही तय करने की प्रक्रिया का विस्तृत ब्यौरा शपथपत्र में दिया जाए।
खंडपीठ ने कहा कि बिजली प्रवाहित बाड़ के कारण लगातार लोगों की जान जा रही है। फसल, संपत्ति और पशुओं की सुरक्षा के उद्देश्य से खेतों, फार्महाउस तथा घरों के आसपास बिजलीयुक्त बाड़ लगाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिसकी चपेट में आने से अनजान लोगों की मौत सहित गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं।
अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाते हैं, लेकिन घटनाओं की लगातार पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि केवल आपराधिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इन हादसों की रोकथाम के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था विकसित किया जाना आवश्यक है।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि बिजलीयुक्त बाड़ का खतरा केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू एवं वन्यजीव भी इसकी चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। इसलिए यह विषय सार्वजनिक सुरक्षा के साथ-साथ पशु संरक्षण से भी जुड़ा गंभीर मामला है।
अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक को जनहित याचिका में प्रतिवादी बनाया जाए। साथ ही राज्य सरकार और बिजली कंपनी से यह भी पूछा है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए कोई स्पष्ट नीति अथवा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू है या नहीं। यदि ऐसी कोई नीति अस्तित्व में नहीं है, तो नई नीति तैयार करने, उसे लागू करने तथा उसके लिए निर्धारित समय-सीमा की जानकारी भी शपथपत्र के माध्यम से देने के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि कोंटा विकासखंड के भाड़म गांव में करंट लगने से पूर्व सरपंच महिला और उनके दो बेटों की मौत की घटना के बाद उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले दो महीनों में बिलासपुर जिले में करंट लगने की अलग-अलग घटनाओं में आठ लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद बिजली विभाग की ओर से फिलहाल लोगों को सतर्क रहने संबंधी एडवाइजरी जारी किए जाने तक ही कार्रवाई सीमित बताई गई है। प्रदेश में जर्जर विद्युत व्यवस्था से जुड़े एक अन्य मामले पर भी उच्च न्यायालय में सुनवाई लंबित है।
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