नयी दिल्ली , मई 28 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर गुरुवार को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
श्री बिरला के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण जेपी नड्डा,संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विधि मंत्री र्जुन राम मेघवाल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई अन्य नेताओं ने भी श्री सावरकर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस मौके पर श्री बिरला ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, " मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा के प्रतीक महान क्रांतिकारी श्री विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। स्वतंत्र्य वीर सावरकर ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने न केवल देश में, बल्कि विदेश में रहते हुए भी क्रांतिकारी विचारधारा को सुदृढ़ किया और असंख्य युवाओं के मन में देशभक्ति की अलख जगाई। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उनके विचारों, लेखन और संगठनात्मक क्षमताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक नई ऊर्जा का संचार किया।"लोकसभा अध्यक्ष ने लिखा, "कठोर कारावास और यातनाओं के बीच भी उन्होंने हर परिस्थिति में राष्ट्रहित और स्वतंत्रता के संकल्प को सदैव सर्वोपरि रखा। वीर सावरकर का जीवन त्याग, संघर्ष, साहस और अटूट इच्छाशक्ति का एक अद्वितीय उदाहरण है। भारत की एकता, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना पर उनके विचार आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करते हैं।"प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर वीर सावरकर को याद करते हुए लिखा, "वीर सावरकर की जयंती पर उन्हें नमन। उनका साहस और देशभक्ति लोगों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। उनकी बौद्धिक क्षमता और सामाजिक सुधार पर उनका ज़ोर भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है।"श्री मोदी ने लिखा, " महान क्रांतिकारी और प्रखर राष्ट्रवादी विचारक वीर सावरकर जी को उनकी जयंती के अवसर पर सादर नमन! उनका व्यक्तित्व शौर्य और मेधा से ओत-प्रोत था, राष्ट्र की हर पीढ़ी को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।"वीर सावरकर के नाम से प्रसिद्ध स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकरका जन्म 28 मई 1883 को हुआ था। वह एक क्रांतिकारी, कवि, लेखक तथा दूरदर्शी समाज सुधारक थे। वीर सावरकर ने 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दौर में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। उन्होंने स्वतंत्रता के उद्देश्य से युवाओं को संगठित और प्रेरित करने के लिए क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना की। उनका अदम्य साहस अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की कुख्यात सेल्युलर जेल में कारावास के दौरान विशेष रूप से दिखाई दिया, जहां उन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों का दृढ़ संकल्प के साथ सामना किया। वीर सावरकर ने क्रांतिकारी विचारों के अतिरिक्त वे सामाजिक सुधार और आधुनिकीकरण के भी प्रबल समर्थक थे। उन्होंने तर्कवाद, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा प्रगतिशील भारतीय समाज के निर्माण के आदर्शों का समर्थन किया। उनकी विरासत उनके लेखन, राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए उनके अथक प्रयासों तथा एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की उनकी परिकल्पना के माध्यम से आज भी जीवित है। उनका जीवन देशभक्ति, धैर्य एवं सुधार का प्रेरणादायक उदाहरण बना हुआ है।
संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में स्थापित वीर सावरकर का चित्र श्रीमती चंद्रकला कुमार कदम द्वारा बनाया गया था तथा इसका आधिकारिक अनावरण 26 फरवरी 2003 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने किया था।
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