रांची , मार्च 27 -- झारखंड के बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा रांची में सिविल एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी विभाग द्वारा आयोजित 'सिविल और पर्यावरण अभियांत्रिकी में हालिया प्रगति 2026 (आरएसीईई 2026)' का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।

इस सम्मेलन में देशभर से शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया तथा सिविल एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी के नवीनतम तकनीकी विकासों पर चर्चा की।

सम्मेलन में प्रमुख वक्तव्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वसंत मतसागर तथा सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कलाचंद सेन द्वारा दिए गए। प्लेनरी व्याख्यान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसएम), धनबाद के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर शरत के. दास, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की के प्रोफेसर सी. एस. पी. ओझा, तथा कल्याणी विश्वविद्यालय के पारिस्थितिकी अध्ययन विभाग के प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जयंता के. बिस्वास द्वारा प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम में ऑनलाइन शोध पत्र प्रस्तुति सत्र भी आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. कलाचंद सेन ने की और समन्वय डॉ. अनुपम दास ने किया। पोस्टर प्रस्तुति सत्र की अध्यक्षता डॉ. स्वागता पायरा और डॉ. राजन चंद्र सिन्हा ने की, जबकि समन्वय डॉ. नीता कुमारी द्वारा किया गया। मौखिक प्रस्तुति सत्र विभिन्न चरणों में आयोजित किए गए। पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. लखबीर सिंह बरार ने की और समन्वय डॉ. जावेद इकबाल तथा डॉ. सप्तर्षि लाहिड़ी ने किया, जबकि दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर बिंदु लाल ने की और समन्वय डॉ. अनुपम दास द्वारा किया गया।

दूसरे दिन के सत्रों की अध्यक्षता प्रोफेसर जयंता के. बिस्वास और प्रोफेसर सी. एस. पी. ओझा ने की, जबकि समन्वय डॉ. प्रदीप कुमार सरकार और डॉ. आशीष बनर्जी द्वारा किया गया।

सम्मेलन के पहले दिन का समापन कैट हॉल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ हुआ, जिसमें छात्रों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।

"शहरी विस्तार और पारिस्थितिकी संरक्षण के बीच संतुलन: मिथक या वास्तविकता?" विषय पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें डॉ. सुकल्याण चक्रवर्ती, डॉ. मणिमोहन, प्रोफेसर जयंता के. बिस्वास और प्रोफेसर कलाचंद सेन ने भाग लिया। इस चर्चा में शहरी विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और आधारभूत संरचना योजना से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम का समापन समापन समारोह और पुरस्कार वितरण के साथ हुआ, जिसमें उत्कृष्ट शोध पत्रों और प्रस्तुतियों को सम्मानित किया गया।

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