सीहोर , अगस्त 06 -- मध्यप्रदेश के सीहोर जिले की प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने बिना वैध पासपोर्ट और वीजा के भारत में रहने के मामले में एक बांग्लादेशी नागरिक को दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार आरोपी मोहम्मद इरशाद (44) के संबंध में 27 अप्रैल 2025 को कोतवाली थाना पुलिस को सूचना मिली थी। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह बांग्लादेश से भारत आया था और उसके पास न तो वैध पासपोर्ट और वीजा था तथा न ही उसने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था।
विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी से प्राप्त जन्म प्रमाणपत्र और उसके माता-पिता के पहचान संबंधी दस्तावेजों का बांग्ला भाषा विशेषज्ञ से अनुवाद कराया। जांच में दस्तावेज बांग्लादेश के पाए गए। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946 की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया।
जांच के दौरान आरोपी का मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड और समग्र आईडी सहित अन्य दस्तावेज जब्त कर संबंधित विभागों से उनका सत्यापन कराया गया तथा मोबाइल की साइबर फोरेंसिक जांच भी कराई गई। विवेचना पूरी होने पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय ने अभियोजन के साक्ष्यों और तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी मोहम्मद इरशाद को विदेशियों विषयक अधिनियम, 1946 की धारा 14-क के तहत दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
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