भुवनेश्वर , मार्च 6 -- उड़ीसा हाई कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे यह पक्का करें कि किसी भी ऐसी इमारत को व्यापार करने का लाइसेंस या अनुमति न दी जाए, जो कानूनी नियमों को पूरा नहीं करती।
कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि अगर कोई पुराना भवन रिहायशी इमारत के रूप में स्वीकृत है, तो बिना सही मंजूरी के उसका इस्तेमाल व्यावसायिक काम के लिए नहीं किया जा सकता। यदि इमारत का कोई हिस्सा अवैध है या नक्शे के खिलाफ बना है, तो प्रशासन को कानून के मुताबिक उस पर कार्रवाई करनी होगी। इसमें अवैध हिस्से को गिराना या कानून के दायरे में आने पर जुर्माना वसूलना शामिल है।
अदालत में दायर याचिका में कटक शहर की हेमराज लेन, नया सड़क का जिक्र किया गया था, जो करीब 13 फीट चौड़ी एक बेहद संकरी गली है। आरोप लगाया गया कि इस घनी आबादी वाले इलाके में बिना सही बुनियादी ढांचे और मंजूरी के इमारतों का व्यापारिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इस एक इमारत में ही लगभग 50-60 दुकानें हैं, लेकिन वहां न तो पार्किंग की जगह है, न ही आग से बचाव का कोई इंतजाम या पर्यावरण संबंधी मंजूरी। इस वजह से ग्राहकों और दुकानदारों की गाड़ियां संकरी सड़क पर खड़ी रहती हैं, जिससे भारी जाम लगता है और आसपास रहने वालों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है। याचिका में यह भी कहा गया कि इस रुकावट की वजह से एम्बुलेंस और दमकल की गाड़ियों जैसे आपातकालीन वाहनों को भी रास्ता नहीं मिल पाता।
न्यायमूर्ति डॉ. संजीब के. पाणिग्रही की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि व्यावसायिक गतिविधियों की वजह से सार्वजनिक सड़कों को बेकार नहीं किया जा सकता। सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह शहरी व्यवस्था को सुधारे और रास्तों पर होने वाली रुकावटों को रोके। न्यायालय ने साफ कहा कि जब कोई निजी दुकान या शोरूम अपनी पार्किंग और सामान ढोने के लिए सड़क का इस्तेमाल करता है, तो वह निजी फायदे के लिए सरकारी संपत्ति का गलत इस्तेमाल कर रहा है। व्यापारिक संस्थानों को अपनी जरूरतें खुद पूरी करनी होंगी, वे अपना बोझ सड़क पर नहीं डाल सकते।
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