बेंगलुरु , जून 17 -- कर्नाटक में बिदादी शहरीकरण भूमि अधिग्रहण विवाद एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है, जहां भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) जद (एस) नेताओं ने विवादास्पद 'वृहद बेंगलुरु एकीकृत शहरीकरण' (जीबीआईटी) परियोजना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है।
विपक्षी नेताओं ने श्री गांधी से इस मामले में दखल देने और पहले चरण में करीब 500 एकड़ भूमि के प्रस्तावित अधिग्रहण को रोकने या उसकी समीक्षा करने का आग्रह किया है। यह अधिग्रहण बिदादी और हारोहल्ली में फैली 7,400 से 7,500 एकड़ की विशाल शहरीकरण योजना का हिस्सा है। उनका आरोप है कि किसानों की सहमति के बिना और भूमि अधिग्रहण के नियमों का उल्लंघन कर इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। कर्नाटक सरकार की इस योजना ने इस मामले में लगातार हो रहे विरोध को हवा दे दी है।
इसमें 24 से अधिक गांवों के किसान एक साल से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका दावा है कि उचित परामर्श के बिना शहरी विस्तार के लिए उपजाऊ कृषि भूमि ली जा रही है। किसानों का यह भी कहना है कि बार-बार बताने के बावजूद उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का हवाला दिया है। इसमें सहमति, मुआवजे और पुनर्वास सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
भाजपा और जद(एस) की ओर से कांग्रेस सरकार पर हमले तेज करने से राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गयी है।दोनों दलों ने श्री गांधी को पत्र लिखकर इस परियोजना को 'राज्य समर्थित जमीन हड़पना' करार दिया है।केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सरकार पर उपजाऊ कृषि भूमि को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए हमले तेज कर दिये हैं। उन्होंने सैकड़ों परिवारों के विस्थापन की चेतावनी देते हुए इसे 'किसानों पर युद्ध' कहा है। भाजपा ने कथित प्रक्रियागत कमियों और सार्वजनिक सुनवाई के अभाव का मुद्दा भी उठाया है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने परियोजना का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के दीर्घकालिक विस्तार और भीड़भाड़ कम करने के लिए यह शहरीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकतर किसानों ने अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए अपनी सहमति दे दी है।
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