बेंगलुरु , जुलाई 15 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बुधवार को बिदादी एकीकृत टाउनशिप परियोजना को लेकर केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर राजनीतिक पाखंड करने का आरोप लगाया । उन्होंने कहा कि यह विवादित परियोजना श्री कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली जनता दल सेक्युलर (जदएस) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन सरकार के समय मंज़ूर और आगे बढ़ाई गई थी।

श्री शिवकुमार ने 2006 के सरकारी रिकॉर्ड, मंत्रिमंडल के फ़ैसले और गज़ट अधिसूचना दिखाते हुए कहा कि उनकी सरकार सिर्फ़ पिछली सरकारों की पुरानी नीति को लागू कर रही है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं है। यह मेरी परियोजना नहीं है। मैं इसका वास्तुकार नहीं कहलाना चाहता। मैं बस पिछले मुख्यमंत्रियों और उद्योग मंत्रियों के फ़ैसलों को आगे बढ़ा रहा हूँ। मैं अपने से पहले के लोगों के दस्तख़त और फ़ैसलों का सम्मान कर रहा हूँ।"ज़मीन अधिग्रहण पर हो रही आलोचना का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने खुद को 'किसान का बेटा' बताया, जो खेती की ज़मीन की भावनात्मक और आर्थिक अहमियत को समझते हैं। उन्होंने कहा, "मैं किसानों का दर्द जानता हूँ। हो सकता है कि आज मैं खेती न करता हूँ, लेकिन मैं एक किसान परिवार में पैदा हुआ हूँ और समझता हूँ कि किसान के लिए ज़मीन क्या मायने रखती है।"मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक विरोधी उन्हें जेल भेजने पर तुले हुए हैं क्योंकि वे मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी तरक्की को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। श्री कुमारस्वामी की हालिया टिप्पणियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "कुछ लोग यह पचा नहीं पा रहे हैं कि मैं मुख्यमंत्री बन गया हूँ। उन्हें नींद नहीं आ रही है। मैं सुनते आ रहा हूँ कि एक दिन श्री शिवकुमार जेल जाएँगे। मैं इसका स्वागत करता हूँ। जेल मेरे लिए कोई नयी बात नहीं है। मुझे वहाँ भेजने की कोशिशें सालों से चल रही हैं।".श्री शिवकुमार ने बताया कि एकीकृत टाउनशिप का प्रस्ताव सबसे पहले 23 सितंबर, 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की अध्यक्षता में मंज़ूर किया गया था। उस समय जदएस-भाजपा गठबंधन ने बिदादी, नंदागुडी और सोलुर समेत पांच एकीकृत टाउनशिप विकसित करने का फ़ैसला किया था। उन्होंने कहा कि बाद में गठबंधन सरकार ने सरकारी- निजी कंपनी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के ज़रिए विकास को मंज़ूरी दी, सार्वभौम निविदा मंगाए और ज़्यादा गांवों को शामिल करके परियोजना का विस्तार किया। साथ ही, "रेड ज़ोन" पाबंदियां भी लगाईं, जिनके तहत सरकारी मंज़ूरी के बिना अधिसूचित क्षेत्र में निजी विकास पर रोक लगा दी गयी।

मुख्यमंत्री के मुताबिक कुमारस्वामी सरकार ने पुनर्वास पैकेज को भी अंतिम रूप दिया, घरों के लिए मुआवज़े के नियम तय किये और निजी डेवलपर डीएलएफ को भारी सुरक्षा जमा राशि लेने के बाद परियोजना पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बाद में श्री येदियुरप्पा और श्री शेट्टार के नेतृत्व वाली भाजपा सरकारों ने न सिर्फ़ इस परियोजना को जारी रखा, बल्कि ज़मीन अधिग्रहण और मुआवज़े में बढ़ोतरी भी की, जिससे पता चलता है कि टाउनशिप प्रस्ताव को सालों तक दोनों पार्टियों का समर्थन मिलता रहा।

उन्होंने श्री कुमारस्वामी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि वह उसी परियोजना का विरोध कर रहे थे जिसकी रूपरेखा उनकी सरकार ने तैयार की थी। उन्होंने कहा, "आपने रेड ज़ोन लगाया, विकास रोका, सार्वभौम निविदा मंगाए और फ़ाइलों पर दस्तख़त किए। आज आप उसी परियोजना का विरोध कर रहे हैं जिसे आपने शुरू किया था। इन तथ्यों को कब तक छिपाया जा सकता है?" मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि श्री कुमारस्वामी के परिवार के सदस्यों ने अधिसूचित टाउनशिप क्षेत्र में लगभग 36 एकड़ ज़मीन खरीदी थी, जबकि आम किसानों को अपनी ज़मीन का स्वतंत्र रूप से लेन-देन करने से रोक दिया गया था। पिछली बार ज़मीन अधिग्रहण के दौरान विपक्ष की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए श्री शिवकुमार ने कहा कि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में कर्नाटक भर में हवाई अड्डा , औद्योगिक गलियारा और सिंचाई परियोजनाओं के लिए हज़ारों एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया गया था।

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