पटियाला , सितंबर 07 -- पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने पंजाब में भविष्य में बिजली संकट की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री से राज्य क्षेत्र में 800-800 मेगावाट की तीन नयी उत्पादन इकाइयां स्थापित करने तथा रोपड़ थर्मल पावर प्लांट में अतिरिक्त क्षमता विकसित करने की मांग की है।
एसोसिएशन ने बठिंडा में 250 मेगावाट की सौर परियोजना स्थापित करने का भी सुझाव दिया है। एसोसिएशन के महासचिव अजय पाल सिंह अटवाल ने सोमवार को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि पंजाब में बिजली की बढ़ती मांग के मुकाबले राज्य की अपनी उत्पादन क्षमता अपर्याप्त है। इससे महंगे बिजली बाजारों से बिजली खरीद पर निर्भरता बढ़ रही है, जिसका असर उद्योग, कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि लंबित सब्सिडी भुगतान और विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से बिजली बिलों के भुगतान में देरी से पीएसपीसीएल की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। एसोसिएशन के अनुसार चालू वित्त वर्ष में निगम को वास्तविक व्यय आवश्यकताओं की तुलना में करीब 7,800 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर का सामना करना पड़ सकता है।
श्री अटवाल ने दावा किया कि राजपुरा और तलवंडी साबो स्थित निजी ताप बिजली संयंत्रों में गर्मियों के दौरान अनिवार्य कोयला भंडार बनाए रखने में भी कमी रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को रात और गैर-सौर समय की मांग पूरी करने के लिए अपनी ताप विद्युत क्षमता बढ़ाने की तत्काल जरूरत है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने में देरी से पंजाब की बाहरी राज्यों और निजी बिजली उत्पादकों से महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता बढ़ेगी। इससे आने वाले वर्षों में बिजली की कमी और कटौती की स्थिति पैदा हो सकती है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित