बैतूल , जनवरी 31 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत डोक्या अंतर्गत गांव मेंढा में बिजली विभाग की घोर लापरवाही से हालात बदतर हो गए हैं। बीते एक सप्ताह से पूरा गांव अंधेरे में डूबा है। बिजली आपूर्ति ठप होते ही नल-जल योजना भी बंद हो गई, जिससे करीब दो हजार की आबादी को मजबूरी में नदी-नालों का दूषित पानी पीना पड़ रहा है। इसका दुष्परिणाम यह है कि गांव में उल्टी, दस्त और बुखार जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत वितरण कंपनी ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के पूरे गांव की बिजली काट दी, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। अंधेरे के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, मोबाइल चार्ज न होने से आपात स्थिति में संपर्क टूट रहा है और बुजुर्ग व महिलाएं सबसे अधिक परेशान हैं। बिजली कटौती ने गांव को मानो विकास के कई साल पीछे धकेल दिया है।

सबसे गंभीर स्थिति पेयजल को लेकर बनी हुई है। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन तो बिछाई गई है, लेकिन बिजली न होने से मोटर बंद हैं और नलों से पानी नहीं आ रहा। मजबूरी में ग्रामीणों को डेढ़ किलोमीटर दूर नाले से पानी लाना पड़ रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि पंचायत या उपभोक्ताओं पर बकाया था तो विभाग ने पहले नोटिस देकर समाधान क्यों नहीं निकाला। सीधे पूरे गांव की बिजली काट देना अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना कदम है, जो यह दर्शाता है कि विभाग को आम जनता की बुनियादी जरूरतों की कोई चिंता नहीं है।

इधर, जिम्मेदार अधिकारी कनिष्ठ यंत्री दीपक सोलंकी का कहना है कि गांव के 113 उपभोक्ताओं पर करीब 7 लाख 13 हजार रुपये बकाया हैं, इसी कारण कनेक्शन काटा गया। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि आंशिक राशि जमा होते ही बिजली बहाल कर दी जाएगी।

हालांकि सवाल बना हुआ है कि क्या प्रशासन और बिजली विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ वसूली तक सीमित है। क्या लोगों की सेहत, बच्चों की पढ़ाई और जीवन की मूलभूत जरूरतों की कोई कीमत नहीं। मेंढा गांव की स्थिति सिस्टम की संवेदनहीनता और बिजली विभाग की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गई है।

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