नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- देश में राष्ट्रीय विद्युत पारेषण नेटवर्क 11 साल में करीब 72 प्रतिशत के विस्तार के साथ पांच लाख सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) से अधिक हो गया है।
मंत्रालय का कहना है कि पारेषण क्षमता में वृद्धि से गैर-जीवाश्म ईंधन से होने वाले बिजली उत्पादन में हो रही वृद्धि को दूर करने में सहायता मिलेगी। गैर जीवाश्म-खनिज ईंधन से बिजली उत्पादन की क्षमता 2030 तक 500 गीगावाट (पांच लाख मेगावाट) तक पहुंचाने का लक्ष्यहै। ट्रांसमिशन लाइनों के पांच लाख सर्किट किलो मीटर ( सीकेएम) तक फैलने की यह उपलब्धि पूरे देश में विश्वसनीय, किफायती और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में तीव्र वृद्धि का समर्थन करने की दिशा में सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।
बिजली मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि इस नेटवर्क में 220 केवी और उससे ऊपर की क्षमता की पारेषण लाइनें और 1,407 जीवीए की ट्रांसफार्मर क्षमता शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास विश्व का सबसे बड़ा एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड है इस नेटवर्क ने 14 जनवरी को राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए भादला द्वितीय से सीकर द्वितीय सबस्टेशन तक 765 केवी की 628 सी.के.एम लंबी ट्रांसमिशन लाइन चालू होने के साथ पांच लाख किलोमीटर को पार करने की यह उपलब्धि हासिल की है।
इस नयी ट्रांसमिशन लाइन के चालू होने से भादला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सौर ऊर्जा परिसर के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से अतिरिक्त 1100 मेगावाट बिजली की निकासी संभव हो सकेगी।
मंत्रालय ने कहा है कि अप्रैल 2014 से,राष्ट्रीय बिजली पारेषण नेटवर्क में 2.09 लाख सर्किट किलो मीटर की लाइनें जोड़ी गयी हैं और इस तरह इस दौरान नेटवर्क में 71.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है1 मंत्रालय ने इसे "एक राष्ट्र-एक ग्रिड-एक आवृत्ति" की परिकल्पना का साकार होना बताया है।
मंत्रालय ने बताया कि इस समय अंतरराज्यीय पारेषण परियोजनाओं के तहत लगभग 40,000 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइनों और 399 जीवीए की ट्रांसफार्मर क्षमता पर काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त अंतरराज्यीय पारेषण परियोजनाओं से 27,500 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइनें और 134 जीवीए की ट्रांसफार्मर क्षमता और जुड़ने की उम्मीद है, जिससे ग्रिड की विश्वसनीयता और बिजली निकासी क्षमता में और वृद्धि होगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित