पटना , सितंबर 8 -- बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने मंगलवार को बिहार में बाढ़ की समस्या से जूझती जनता की पीड़ा की चर्चा करते हुए कहा कि बिहार को केंद्र से भीख नहीं, उसके हक और साख के अनुरूप धन चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बिहार में एक दशक बाद आयी भीषण बाढ़ के बीच राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब राज्य का खजाना खाली है और राजकोषीय दबाव चरम पर है, ऐसे समय में उन्हें सड़क से सदन तक बिहार और बिहारवासियों के अधिकार के लिए किये गये अपने संघर्ष की याद आ रही है।

श्री प्रसाद ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता और विपक्ष में रहते हुए बिहार के अधिकारों के लिए जितना संघर्ष किया है, उतना आज तक किसी ने नहीं किया होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में सरकार में बिहार से बड़ी संख्या में केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद बिहार के हितों की रक्षा नहीं हो रही है।

राजद अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2004 में राजद के 24 सांसदों के समर्थन से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनी और वह रेल मंत्री बने। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2004 से 2009 के दौरान अपने राजनीतिक प्रभाव के बल पर बिहार के विकास के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से एक लाख 44 हजार करोड़ रुपये की राशि दिलायी गयी। उन्होंने कहा कि उस समय जो कहा गया, उसे पूरा किया गया।

श्री प्रसाद ने आरोप लगाया कि वर्ष 2005 के बाद उनकी सरकार के दौरान बिहार के लिए स्वीकृत इसी पैकेज की राशि का इस्तेमाल तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी सरकार की उपलब्धियों के रूप में किया। उन्होंने कहा कि केंद्र में प्रभावशाली पदों पर रहने के बावजूद बिहार से जुड़े नेताओं ने राज्य के लिए पर्याप्त केंद्रीय सहायता नहीं दिलायी, जबकि उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हमेशा बिहार के हित में आवाज उठायी।

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