रायपुर , जुलाई 23 -- छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल श्रम के मामलों में रेस्क्यू के बाद केवल बच्चों को मुक्त कराने तक कार्रवाई सीमित न रखते हुए दोषियों के खिलाफ बहुस्तरीय कानूनी कार्रवाई और प्रत्येक मुक्त बच्चे के समग्र पुनर्वास को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोग कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रभावी क्रियान्वयन, त्वरित रेस्क्यू, विधिक कार्रवाई, विभागीय समन्वय तथा बाल श्रमिकों के पुनर्वास की समीक्षा की गई। बैठक में श्रम विभाग के उप श्रम आयुक्त, सहायक श्रम अधिकारी तथा एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के राज्य समन्वयक विपिन ठाकुर उपस्थित थे।
बैठक में निर्देश दिए गए कि रेस्क्यू किए गए प्रत्येक बाल श्रमिक को अनिवार्य रूप से बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुरूप संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि मुक्त कराए गए बच्चों को आर्थिक सहायता और क्षतिपूर्ति राशि के वितरण में विलंब हो रहा है। इस पर आयोग ने चिंता व्यक्त करते हुए पात्र प्रत्येक बाल श्रमिक को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर बल दिया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बाल श्रम से जुड़े मामलों में कार्रवाई केवल बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम तक सीमित नहीं रहेगी। प्रकरण की प्रकृति के अनुसार भारतीय न्याय संहिता, किशोर न्याय अधिनियम, बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 तथा अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत भी तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
आयोग ने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम की धारा-3 के तहत बालकों के नियोजन पर पूर्ण प्रतिबंध तथा धारा-14 और 14-बी के तहत दोषी नियोजकों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई और मुक्त बाल श्रमिकों के पुनर्वास संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रत्येक जिले की बाल श्रम टास्क फोर्स और बंधुआ मजदूरों के लिए गठित सतर्कता समिति के बीच समन्वय बढ़ाने, गृह, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की भूमिका को और प्रभावी बनाने तथा बाल श्रमिकों को शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जोड़ने की दिशा में समन्वित प्रयास करने पर सहमति बनी।
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