रायपुर , मई 13 -- छत्तीसगढ़ हेडमास्टर फेडरेशन ने बालोद जिले में कलेक्टर द्वारा प्राचार्यों के निलंबन एवं एक वेतन वृद्धि रोके जाने की कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इसे नियम विरुद्ध एवं अधिकार क्षेत्र से बाहर की गई कार्रवाई बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन द्वारा एक जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 10 वीं एवं 12 वीं के परीक्षा परिणामों की समीक्षा के आधार पर कथित रूप से खराब परिणाम देने वाले हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों पर बिना किसी नोटिस के निलंबन की कार्रवाई की गई है, जो प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

संगठन का कहना है कि प्राचार्य संवर्ग द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी होते हैं, जिन पर निलंबन जैसी कार्रवाई का अधिकार केवल लोक शिक्षण संचालनालय या शिक्षा सचिव स्तर पर ही होता है। जिला स्तर पर केवल अनुशंसा भेजी जा सकती है, किंतु यहां सीधे कार्रवाई की गई, जिसे संगठन ने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है।

हेडमास्टर फेडरेशन ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष बेहतर परिणाम देने वाले विद्यालयों में इस वर्ष अपेक्षाकृत कम परिणाम आने पर सीधे प्राचार्यों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। संगठन ने कहा कि परीक्षा परिणाम कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें पर्याप्त शैक्षणिक स्टाफ, शैक्षणिक वातावरण, गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव तथा विद्यार्थियों और अभिभावकों का सहयोग प्रमुख हैं।

संगठन ने इस कार्रवाई को अव्यवहारिक और एकतरफा बताते हुए इसकी निंदा की है तथा प्रदेश के शिक्षा मंत्री से तत्काल संज्ञान लेकर संबंधित प्राचार्यों पर की गई कार्रवाई को शून्य घोषित करने की मांग की है।

फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों और प्राचार्यों के साथ इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रही तो संगठन प्रदेशभर में इसका कड़ा विरोध करेगा।

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