बालोद , अगस्त 14 -- छत्तीसगढ़ के बालोद स्थित उप जेल में पदस्थ जेल प्रहरी महेंद्र वर्मा के अचानक लापता होने का मामला सामने आया है। लापता होने से पहले उन्होंने अपने भांजे के मोबाइल पर एक वीडियो भेजकर स्कूटी की डिक्की में पत्र रखे होने की जानकारी दी थी। परिजनों को डिक्की से आठ पन्नों का पत्र मिला है, जिसे पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर के नाम संबोधित किया गया है। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने शुक्रवार को गुमशुदगी दर्ज कर महेंद्र वर्मा की तलाश शुरू कर दी है लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है।
परिजनों के मुताबिक महेंद्र वर्मा ने पत्र में जेलर पर मानसिक प्रताड़ना और दबाव बनाने सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में जेल के भीतर एक बंदी से मोबाइल मिलने की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि इस मामले में जेलर उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे थे और कथित रूप से आरोप अपने ऊपर लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
जल प्रहरी महेंद्र ने अपने पत्र में दुर्ग जेल अधीक्षक मनीष संभाकर का नाम भी लिया है और मानसिक तनाव तथा प्रताड़ना से जुड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने ड्यूटी के दौरान अपनी तलाशी लिए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि 12 अगस्त की शाम तलाशी के दौरान उनके साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्होंने रोजाना तलाशी लिए जाने की बात भी पत्र में लिखी है।
आठ पन्नों के पत्र की शुरुआत महेंद्र वर्मा ने अपने बेटे जयंत को संबोधित करते हुए की है। उन्होंने बेटे से माफी मांगते हुए लिखा है कि वह अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार का ध्यान रखने की बात कही है। साथ ही बेटे जयंत से कलेक्टर बनने का अपना सपना पूरा करने की इच्छा जताई है।
पत्र में महेंद्र ने अपने दूसरे बेटे से भी माफी मांगते हुए उसके डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने की बात कही है। पत्नी को संबोधित करते हुए जीवनभर साथ देने के लिए आभार जताया और माफी मांगी है। माता-पिता से भी उन्होंने माफी मांगते हुए लिखा है कि वह उनके बुढ़ापे का सहारा नहीं बन पाएंगे।
पत्र में महेंद्र ने मनीष संभाकर समेत कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। जेल में बंदियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने मामले से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और उसकी जांच कराने की भी मांग की है।
पत्र के अंतिम हिस्से में महेंद्र ने अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने परिवार को बालोद से कहीं और ले जाने और बच्चों का किसी अच्छे स्कूल में दाखिला कराने की अपील की है। आठ पन्नों का यह पत्र परिजनों और पुलिस के पास मौजूद है।
वीडियो और पत्र मिलने के बाद परिजन तत्काल थाने पहुंचे और महेंद्र वर्मा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
गौरतलब है कि बालोद जेल में सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों तक मोबाइल पहुंचने को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। दिसंबर 2025 में जिला जेल परिसर से एक मोबाइल बरामद हुआ था, जिसके बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे थे।
फिलहाल महेंद्र वर्मा के पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच और लापता जेल प्रहरी का पता चलने के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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