बालोद , मई 11 -- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। जिले के आठ प्राचार्यों को निलंबित किए जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी ने मामले को और तूल दे दिया है। वहीं, प्राचार्य संघ ने कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे एकतरफा और तानाशाहीपूर्ण कदम बताया है।
प्रशासन द्वारा जारी आदेश में जिले के आठ प्राचार्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा कार्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में 14 अन्य शिक्षकों एवं प्राचार्यों की वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई भी की गई है। आदेश में गिरते शिक्षा स्तर को कार्रवाई का आधार बताया गया है।
कार्रवाई के विरोध में कल शाम प्राचार्य संगठन के पदाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान प्राचार्यों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। संगठन के जिला संयोजक लोकेश कुमार साहू ने कहा कि यदि प्रशासन ने सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन किया जाएगा।
मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी मधुलिका तिवारी ने भी इस विषय पर कुछ भी कहने से मना कर दिया। इससे शिक्षा विभाग में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
प्राचार्य संघ के पदाधिकारी एम.आर. खान ने कहा कि बिना समुचित जांच और अध्ययन के प्राचार्यों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन ने विभिन्न जिलों की परिस्थितियों और परीक्षा परिणामों का तुलनात्मक अध्ययन किया है।
कलेक्टर से चर्चा के बाद बाहर निकले प्राचार्य प्रतिनिधियों ने कहा कि वार्ता सकारात्मक रही है, हालांकि प्रशासन आगे क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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