बेंगलुरु , अगस्त 22 -- बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और उपाध्यक्ष वाईआर सदाशिव रेड्डी के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है, जिसमें उपाध्यक्ष रेड्डी ने मनन मिश्रा से 15 दिनों के भीतर पद छोड़ने की मांग की है, जबकि मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उन्हें बीसीआई के दो-तिहाई से अधिक सदस्यों का समर्थन हासिल है।
श्री रेड्डी ने श्री मिश्रा को लिखे छह पन्नों के पत्र में उनके कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं, पारदर्शिता की कमी, भाई-भतीजावाद और बार काउंसिल अध्यक्ष के पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने बीसीआई और बीसीआई ट्रस्ट पर्ल के स्वतंत्र ऑडिट की भी मांग की।
श्री रेड्डी ने आरोप लगाया कि बीसीआई के धन से लगभग 150 करोड़ रुपये 2020 में बने बीसीआई ट्रस्ट पर्ल में भेजे गए थे। उन्होंने दावा किया कि ऐसी शिकायतें मिली हैं कि बीसीआई की मंजूरी या नवीनीकरण चाहने वाले विधि महाविद्यालयों से ट्रस्ट में 25 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का योगदान करने के लिए कहा जा रहा था।
उन्होंने बीसीआई के पदों पर भर्ती में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि योग्यता-आधारित चयन प्रक्रिया का पालन किए बिना अध्यक्ष के परिवार और सहयोगियों के करीबी लोगों को नियुक्तियां बांटी गईं।
श्री रेड्डी ने 13 अगस्त को हैदराबाद की राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान अकादमी (नालसार) विधि विश्वविद्यालय के छात्रों के संबंध में जारी निर्देश को लेकर भी श्री मिश्रा पर निशाना साधा। इस निर्देश में चेतावनी दी गई थी कि जो छात्र दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की मौजूदगी के खिलाफ अभियान में शामिल थे, उन्हें अधिवक्ता के तौर पर नामांकन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापक आलोचना के कुछ घंटों बाद ही यह आदेश वापस ले लिया गया। श्री रेड्डी ने आरोप लगाया कि यह निर्देश बीसीआई के अन्य सदस्यों से सलाह किए बिना जारी किया गया था और यह विधि छात्रों के पूरे स्नातक होने वाले बैच को डराने-धमकाने की कोशिश थी।
उन्होंने मिश्रा के लगातार कार्यकाल पर भी सवाल उठाए और कहा कि बीसीआई अध्यक्ष का चुनाव दो साल के कार्यकाल के लिए होता है, जबकि मिश्रा 2012 से ही इस पद पर बने हुए हैं।
श्री मिश्रा ने आरोपों का जवाब देते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया और श्री रेड्डी के कदम को 'राजनीतिक प्रतिशोध' और 'राजनीतिक स्टंट' करार दिया। श्री मिश्रा ने कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल के चुनावों के बाद श्री रेड्डी की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा, "सबसे पहले मुझे यह साफ करना होगा कि वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष नहीं हैं बल्कि आज वह स्टेट बार काउंसिल के सदस्य भी नहीं हैं।"रिपोर्ट के समय हालांकि बीसीआई की वेबसाइट पर श्री रेड्डी को उपाध्यक्ष के तौर पर दिखाया गया था।
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