जालौन , सितंबर 10 -- उत्तर प्रदेश में जालौन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अंत्येष्टि स्थलों की बदहाली का मामला सामने आया है। बारिश के दौरान कई गांवों में पक्के श्मशान घाट, टीन शेड और पहुंच मार्ग नहीं होने के कारण ग्रामीणों को शवों का अंतिम संस्कार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच ने इसे गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय को ज्ञापन सौंपकर स्थायी समाधान की मांग की है। मंच के संयोजक एडवोकेट कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि विगत एक माह में हरकौती सहित नौ से अधिक गांवों में ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं। हरकौती में देवेंद्र दोहरे की मृत्यु के बाद तेज बारिश के बीच परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षित स्थान और तिरपाल की व्यवस्था करने में परेशानी हुई। भदरेखी, नौरेजपुर, सुरावली, गोराकरनपुर, गढ़गुवा, तीतराखलीलपुर, खैरवार व्योना और हैदलपुर समेत अन्य गांवों में भी श्मशान घाट तक पहुंचने वाले रास्तों के खराब होने और जलभराव की समस्या बताई गई।
ज्ञापन में कहा गया कि दलित एवं वंचित बस्तियों में कई स्थानों पर श्मशान के लिए भूमि चिन्हित नहीं है और जहां भूमि उपलब्ध है, वहां भी पक्का शेड, चबूतरा, पेयजल तथा जलनिकासी जैसी सुविधाओं का अभाव है। मंच ने इसे मृतकों की गरिमा से जुड़ा विषय बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानजनक अंतिम संस्कार के अधिकार का मुद्दा उठाया।
प्रतिनिधिमंडल ने पक्के शेड, ऊंचे चबूतरे, हैंडपंप, सोलर लाइट, शौचालय और सीसी सड़क निर्माण, जिलेभर में सर्वे तथा मानसून तक अस्थायी शेड व तिरपाल की व्यवस्था कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न तहसीलों के संयोजक, ग्राम प्रधानों सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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