बारां , सितम्बर 18 -- राजस्थान के बारां नगर परिषद में 21 सितंबर को होने वाले सभापति चुनाव के साथ ही शहर की नयी सरकार की तस्वीर साफ हो जायेगी।
साठ सदस्यीय नगर परिषद में आम आदमी पार्टी (आप) के 31 पार्षद निर्वाचित होकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुके हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह 31 का जनादेश सभापति चुनाव में किस रूप में सामने आता है।
सभापति पद के लिए आप की ओर से शीतल राठौर ने नामांकन दाखिल किया है। उनके साथ सहयोगी पार्षद चंद्रकला सुमन भी मौजूद रही। वहीं कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी भारद्वाज और भाजपा की ओर से नीलेश जैन ने भी नामांकन दाखिल किया है। तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के मैदान में आने से चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गयी है।
चुनाव परिणाम में आप को 31, कांग्रेस को 18, भाजपा को नौ और निर्दलीय प्रत्याशियों को दो सीटें मिली हैं। ऐसे में कोई अनहोनी न हुई तो आप के पास सभापति चुनाव के लिए स्पष्ट बहुमत मौजूद है। इसके बावजूद कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों द्वारा नामांकन दाखिल किये जाने से शहर में राजनीतिक समीकरणों को लेकर तरह- तरह की चर्चाएं शुरू हो गयी हैं।
निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति नहीं बने, इसके लिए अन्य दलों का नामांकन दाखिल करना सामान्य चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा भी हो सकता है। अंतिम स्थिति 21 सितंबर को पार्षदों के समर्थन और मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।
शहर में इस समय सबसे अधिक चर्चा इसी बात को लेकर है कि क्या 31 पार्षदों का जनादेश सभापति चुनाव में एकजुट दिखाई देगा। पिछले निकाय चुनावों में सामने आए राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए दल- बदल और जोड़-तोड़ को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हैं। सोशल मीडिया से लेकर चौराहों तक राजनीतिक समीकरणों और संभावित 'खेल' को लेकर कयास लगाये जा रहे हैं। किसी भी तरह के आर्थिक लेन-देन या खरीद-फरोख्त की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसी चर्चाओं ने चुनाव को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। आप खेमे के नेता भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाये हुए हैं।
निकाय चुनाव के परिणामों ने भाजपा और कांग्रेस के पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों के बीच आम आदमी पार्टी को तीसरे विकल्प के रूप में मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। आप के 31 पार्षदों का जीतना इस बदलाव का स्पष्ट परिणाम है। अब 21 सितंबर का सभापति चुनाव इसी जनादेश की अगली राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
शहरवासियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि 60 में से 31 पार्षदों का स्पष्ट जनादेश सभापति चुनाव में भी उसी रूप में कायम रहता है या चुनावी राजनीति कोई नया समीकरण सामने लाती है। 21 सितंबर को होने वाला मतदान इस पूरे राजनीतिक अध्याय का निर्णायक पड़ाव होगा।
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