बारां , अक्टूबर 21 -- राजस्थान में 'हम भारत के लोग' की भावना को आत्मसात करते हुए निकली लोकमंथन यात्रा का बुधवार को बारां में भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया।

शिक्षक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सहित विभिन्न सामाजिक एवं वैचारिक संगठनों तथा नगर के गणमान्य नागरिकों ने यात्रा का अभिनंदन किया। यात्रा के माध्यम से भारतीय लोकजीवन, लोक परंपराओं, कला-संस्कृति, साहित्य, ग्रामीण खेलों, योग और ज्ञान-विज्ञान के विविध आयाम एक मंच पर साकार हुए। विभिन्न आयोजनों में लोक संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली और युवाओं सहित बड़ी संख्या में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

लोकमंथन यात्रा के संयोजक श्यामबाबू मेहता ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौराहे पर संस्कृत भारती, लघु उद्योग भारती एवं इतिहास संकलन समिति की ओर से आकर्षक प्रदर्शनियां लगाई गईं। इनके माध्यम से भारतीय भाषाओं, स्वदेशी उद्यमों और देश के गौरवशाली इतिहास के विभिन्न पहलुओं से आमजन को परिचित कराया गया।

लंका कॉलोनी में क्रीड़ा भारती ने पारंपरिक ग्रामीण खेलों की प्रस्तुतियां दीं। विज्ञान भारती की विज्ञान प्रदर्शनी में आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की गईं। सायंकाल लंका कॉलोनी स्थित प्रीत गार्डन में आयोजित रंगमंचीय समारोह राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बन गया। संस्कार भारती के कलाकारों ने तेजाजी गायन, हीड़ गायन और रावटा जैसी लोकविधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर प्रदेश की लोकधारा को मंच पर साकार किया।

साहित्य परिषद से जुड़े कवियों एवं साहित्यकारों ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया। विद्या भारती के बाल कलाकारों ने संस्कृति और संस्कारों से जुड़े लोकगीत प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।

समारोह में केलवाड़ा का सहरिया सॉन्ग, भंवरगढ़ का योग पिरामिड और पालायथा का भरतनाट्यम विशेष आकर्षण रहे। विविध लोकविधाओं और कलात्मक प्रस्तुतियों ने बारां जिले की सांस्कृतिक विविधता, लोकजीवन की समृद्धि और परंपराओं की जीवंतता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

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