बारां , जनवरी 19 -- राजस्थान में बारां के कोटा रोड स्थित गजनपुरा के निकट बने खाद्य, शिल्प और होटल प्रबंधन संस्थान (एफसीआईएचएमआई) को मान्यता मिलने को लेकर पर्यटक विभाग बेबस है।

सूत्रों ने सोमवार को बताया कि इसकी मुख्य वजह संस्थान के भवन निर्माण में मापदंड के मुताबिक भारी कमियां हैं। जब तक मापदंडों के आधार पर भवन निर्माण की कमियों का निस्तारण नहीं होगा और छात्रावास नहीं बन जाता तब तक इस संस्थान को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय से मान्यता मिलन मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। यही कारण है कि इस संस्थान को बनाने में कार्य कर रही एजेंसी ने भवन को अब तक सौंपा तक नहीं है। अधूरे निर्माण से भवन को पर्यटन विभाग भी लेने को तैयार नहीं है। दुखद स्थिति यह है कि छह बरस बाद भी ऐसी उलझनों में यहां खाद्य एवं शिल्प संस्थान (एफसीआई) का विषय शुरू नहीं हो पाया।

पर्यटन विभाग की झालावाड़ की बारां जिला प्रभारी रजनी कुमारी ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय के दल ने अभी संस्थान में सुरक्षाकर्मी कक्ष, पानी की टंकी सहित कई मुख्य कार्यों में कमी पाई है। राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (आरएसआरडीसी) ने इस कार्य को विजन हाउस कंस्ट्रक्शन कंपनी से करवाया है, लेकिन कंपनी शेष कार्य पूर्ण नहीं कर रही थी। संस्थान को लेकर विभाग ने जिला कलेक्टर की मौजूदगी में बैठक भी की थी और अधूरे पड़े कार्य बताए थे। कुछ कार्य हुए भी, लेकिन अन्य काम नहीं हो पाए। पूर्ण भवन सौंपने के बाद ही यहां विषय शुरू किए जा सकते हैं। इससे पूर्व पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार का दल निरीक्षण करेगा।

रजनी कुमारी ने बताया कि भारत सरकार की ओर से बारां समेत झालावाड़, धौलपुर और सवाईमाधोपुर में यह चार परियोजनायें 2017 में स्वीकृत हुई थीं। बारां में निर्माण कार्य एजेंसी आरएसआरडीसी ने इसका ठेका विजन हाउस कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया था जिसे 2019 में यह कार्य पूर्ण करना था, लेकिन कार्य लेट लतीफी में हुआ वह भी अपूर्ण। देरी की वजह का कारण भी ठेकेदार रहा।

उन्होंने बताया कि अब कुछ वर्षों से आरएसआरडीसी ने छात्रावास के स्वीकृत बजट को अपर्याप्त बताना शुरू कर दिया। तो दूसरी ओर राष्ट्रीय होटल प्रबंधन एवं खानपान प्रौद्योगिकी परिषद (एनसीएचएमसीटी) ने ठेकेदार की लापरवाही मानते हुए अतिरिक्त बजट देने से इन्कार कर दिया। पिछले वर्ष भी केंद्रीय निरीक्षण दल ने खाद्य एवं शिल्प संस्थान के संचालन एवं सुरक्षा को मान्यता देने से पहले आवश्यक मापदंडों के अनुरूप व्यवस्थाओं का अवलोकन किया था। यहां छात्रावास निर्माण, गैस टैंक, बार काउंटर सहित कुछ मुख्य कमियां बताई थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा छात्रावास निर्माण के लिए बजट कम बताया और उसका निर्माण नहीं किया इसी कारण कॉलेज का संचालन न होने से मान्यता मिलने में दिक्कत आ गई।

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2017 में यहां छात्रावास निर्माण के लिए एक करोड़ 10 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। काम वर्ष 2019 में पूरा करना था। ठेकेदार की लापरवाही से काम में विलम्ब हुआ। परिसर में छात्र-छात्रा छात्रावास तैयार हुए नहीं।

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