नयी दिल्ली , अक्टूबर 23 -- केंद्रीय गृह मंत्रालय भारतीय सेना के साथ मिलकर देश में नागरिक सुरक्षा का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की पहल कर रहा है जिसके पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 600 मास्टर ट्रेनर को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है।
गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि अगले महीने के दूसरे सप्ताह तक यह प्रशिक्षण पूरा करने की योजना बनाई गई है। इसके बाद प्रत्येक मास्टर ट्रेनर अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 100 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा। इस तरह कुल 60,000 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आपात स्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया देने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए तैयारी बढ़ाना है।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन को आगे बढ़ाने के लिए की जा रही है, जिसमें उन्होंने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर तैयारी से लैस नागरिक सुरक्षा नेटवर्क बनाने की बात कही थी। गृह मंत्रालय के अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षक महानिदेशालय ने भारतीय सेना के साथ मिलकर यह पायलट पहल शुरू की है।
पहले चरण में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं। प्रत्येक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से 50 मास्टर ट्रेनर को भारतीय सेना के नामित प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव है।
प्रशिक्षण में तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन तथा हवाई हमलों के खतरों के प्रति जागरूकता, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, आग से बचाव, रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु खतरों से जुड़ी जानकारी, घायलों की देखभाल, खोज और बचाव, तथा आपातकालीन संचार, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा और नागरिक-सैन्य समन्वय शामिल हैं।
इस पहल के तहत मास्टर ट्रेनर के जरिए आगे स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 60,000 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों तक विशेष प्रशिक्षण पहुंचाने की क्षमता बनेगी।
यह पहल भारतीय सेना के संचालन अनुभव को नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों के नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कदम है। पायलट चरण के परिणामों के आधार पर इसे अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
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