लखनऊ , अप्रैल 06 -- उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने प्रदेश में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए गोबर गैस (बायोगैस) के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गोबर से बनने वाली बायोगैस न केवल सस्ता और स्वच्छ ईंधन है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है।

सोमवार को विधान भवन स्थित कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री धर्मपाल सिंह ने निर्देश दिया कि सभी गौशालाओं में गोबर का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। गर्मी के मौसम को देखते हुए उन्होंने गौशालाओं में पानी, हरा चारा, भूसा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के साथ ही निःशुल्क बोरिंग कराने के भी निर्देश दिए, ताकि पानी की कमी न हो।

उन्होंने प्रत्येक गौशाला में न्यूनतम 10 कुन्टल भूसे का आरक्षित भंडार रखने को अनिवार्य बताया। उन्होंने 15 अप्रैल से विशेष भूसा संग्रह अभियान चलाकर दान और क्रय के माध्यम से भंडारण बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही गेहूं की कटाई के समय स्थानीय किसानों से 400 से 650 रुपये प्रति कुंतल की दर से भूसा खरीदने को कहा गया।

गोचर भूमि के विकास पर जोर देते हुए मंत्री ने निर्देश दिया कि 15 मई तक हाईब्रिड नेपियर घास की रोपाई सुनिश्चित की जाए। इसके लिए रूटस्लीप फार्मों से चारा उत्पादक किसानों और गोआश्रय स्थलों को पौध उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने वर्षभर हरे चारे की आपूर्ति के लिए किसानों से अनुबंध करने और गोचर भूमि का विस्तार करने पर भी बल दिया।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 7416 गोआश्रय स्थलों में लगभग 12.37 लाख गोवंश संरक्षित हैं। 2500 से अधिक गौशालाओं में बीमार पशुओं के लिए आइसोलेशन कक्ष बनाए गए हैं। जिस पर उन्होंने निर्देश दिया कि निरीक्षण में पाई गई कमियों को शीघ्र दूर किया जाए।

उन्होंने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट और पंचगव्य उत्पाद जैसे अगरबत्ती, धूपबत्ती, गोकाष्ठ, दीये आदि के निर्माण को बढ़ावा देने और महिला स्वयं सहायता समूहों को इससे जोड़ने पर भी जोर दिया।

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