हैदराबाद , फरवरी 17 -- तेलंगाना के आईटी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने कहा कि हैदराबाद इस समय एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां प्रौद्योगिकी और जीव विज्ञान का अभूतपूर्व संगम हो रहा है।
श्री श्रीधर ने कहा कि शहर अब केवल बड़े पैमाने पर विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञान-आधारित नेतृत्व की ओर अग्रसर है और स्वयं को भविष्य की वैश्विक प्रयोगशाला के रूप में स्थापित कर रहा है। उन्होंने बताया कि 15 लाख तकनीकी कार्यबल और पांच लाख से अधिक जीवन विज्ञान पेशेवर मिलकर वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा बदल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हैदराबाद दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में उभरा है, जो अरबों लोगों को दवाएं और टीके उपलब्ध करा रहा है। हाई-टेक कॉरिडोर और जीनोम वैली के साथ-साथ स्थित होने से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत जीवविज्ञान का वास्तविक और भौतिक सहयोग संभव हुआ है, जिससे नवाचार की गति तेज हुई है। इस संगम से नयी पीढ़ी के टेकबायो ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसीएस) उभरे हैं, जिन्हें अब ग्लोबल वैल्यू सेंटर्स के रूप में पुनर्परिभाषित किया जा रहा है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के विशेष मुख्य सचिव संजय कुमार (आईएएस) ने कहा कि तेलंगाना की जीवन विज्ञान यात्रा बल्क ड्रग्स और प्रोसेस केमिस्ट्री से आगे बढ़कर नवाचार-आधारित विकास तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद विश्व के लगभग एक-तिहाई टीकों का उत्पादन करता है और कोविड-19 महामारी के दौरान 150 से अधिक देशों को टीकों की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि राज्य की लाइफ साइंसेज नीति 2026-30 में बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स, सेल एवं जीन थेरेपी, एआई-सक्षम दवा खोज और डिजिटल रूप से एकीकृत विनिर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
श्री कुमार ने कहा कि 2024 और 2025 के दौरान भारत में स्थापित लाइफ साइंसेज जीसीसी में से 40 प्रतिशत से अधिक तेलंगाना में स्थापित हुए हैं और वर्तमान में 150 से अधिक जीसीसी संचालित हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2026 में 100 से अधिक नए जीसीसी स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 'यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी' और 'तेलंगाना स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज' जैसी पहलों के माध्यम से प्रतिभा विकास को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है।
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