नयी दिल्ली , अप्रैल 14 -- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि बाबासाहेब ने राष्ट्र को एक नयी दिशा और दृष्टि दी तथा राष्ट्र निर्माण की एक सुदृढ़ नींव रखी है।

श्री बिरला ने आज 'अम्बेडकर जयंती' के अवसर पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की ओर से आयोजित "सामाजिक न्याय से राष्ट्रीय विकास: डॉ. अम्बेडकर के सिद्धांतों पर आधारित विकसित भारत 2047" कार्यक्रम में कहा कि डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्थापित समानता, न्याय और सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांतों को आज पूरा देश कृतज्ञता के साथ याद करता है।

उन्होंने कहा कि बाबासाहेब के विचार आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्र और समाज आने वाली पीढ़ियों में साहस, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और सेवा भावना का संचार करना चाहते हैं, तो उन्हें बाबासाहेब के आदर्शों को अपनाना होगा। बाबासाहेब ने अपने जीवन से सिद्ध कर दिया कि व्यक्ति के सामने कितनी भी चुनौतियां या कठिनाइयां क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और स्पष्ट लक्ष्य सफलता की ओर ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद बाबासाहेब ने शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।

महिला सशक्तिकरण पर बाबासाहेब के प्रगतिशील दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए, श्री बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की प्रगति के लिए महिलाओं के पास समान अधिकार और अवसर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी बाबासाहेब के उस विजन को दर्शाती है, जिनका सपना था कि समाज के हर वर्ग विशेष रूप से वंचित और पिछड़े वर्गों को न्याय और समान अधिकार मिलें।

श्री बिरला ने कहा कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए गरिमा और अवसर सुनिश्चित करना बाबासाहेब के विश्व-दर्शन के केंद्र में था। उन्होंने कहा, " यह हम सभी का उत्तरदायित्व है कि हम बाबासाहेब के विचारों को समाज के हर कोने तक पहुँचाएँ और शिक्षा के माध्यम से भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाएँ।"उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने न केवल भारत के संविधान का प्रारूप तैयार किया, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब एक महान अर्थशास्त्री थे जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की वित्तीय संरचना, औद्योगिक विकास और आर्थिक शक्ति के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की। उन्होंने श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और उनके लिए न्याय सुनिश्चित करने हेतु निरंतर कार्य किया। श्री बिरला ने कहा कि ऊर्जा, सिंचाई और शासन जैसे क्षेत्रों में बाबासाहेब के विचार आज भी प्रासंगिक हैं।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों और समानता के सिद्धांतों को अपनाया जा रहा है, और इन्हें आकार देने में बाबासाहेब के विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने आगे कहा कि समानता, न्याय और बंधुत्व के बाबासाहेब के आदर्शों ने लोकतंत्र को मजबूत करने का मार्ग दिखाया है।

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