अमृतसर , फरवरी 20 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रोफेसर सरचंद सिंह ख्याला ने सचखंड श्री दरबार साहिब के मुख्य ग्रंथी तथा श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के ताज़ा खुलासों पर गहरी हैरानी व्यक्त करते हुए पूरे मामले को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पंथक मर्यादा के लिए चिंताजनक बताया है।
प्रो ख्याला ने शुक्रवार को कहा कि यदि दो दिसंबर 2024 को अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और उनके साथियों के विरुद्ध श्री अकाल तख्त साहिब से की गयी कार्रवाई को 'भाजपा द्वारा डिज़ाइन किया गया' कहकर सिख पंथ को गुमराह करने के लिए सिंह साहिबान पर किसी भी प्रकार का दबाव बनाया गया है, तो यह न केवल निंदनीय है, बल्कि पंथक संस्थाओं की संवैधानिक और धार्मिक स्वायत्तता पर सीधा हमला है। कोई सोच भी नहीं सकता कि कोई व्यक्ति इस हद तक गिर सकता है।
प्रो. ख्याला ने ज्ञानी रघबीर सिंह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि उन्हें यह कहने के लिए दबाव डाला गया, " दो दिसंबर वाला सारा इल्ज़ाम आप भाजपा पर डाल दें, आरएसएस पर डालकर कह दें कि मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई, दो दिसंबर को जो फैसला किया गया वह मुझे गुमराह करके कराया गया," तो यह केवल राजनीतिक बेईमानी ही नहीं, बल्कि नैतिकता के पूर्ण पतन का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो दिसंबर को अकाल तख्त साहिब की फसील से स्वयं सिंह साहिबान ने कहा था कि ये फैसले किसी राजनीतिक दबाव में नहीं, बल्कि गुरमत की रोशनी में सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में बाद में उन फैसलों को भाजपा या आरएसएस के सिर मढ़ने की साज़िश रचना श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और संस्थागत स्वायत्तता पर सीधा प्रहार है और उसे घटिया राजनीतिक विवाद में घसीटने के समान है।
प्रो. ख्याला ने कहा कि अपने पुराने सहयोगी भाजपा पर निराधार आरोप थोपने की साज़िश रचकर श्री बादल ने विश्वास की हत्या की है। उन्हें भाजपा को बदनाम करने की इस साज़िश के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि श्री बादल परिवार ने पंथक पदों का सबसे अधिक निरादर किया है। जिन पर पंथक मर्यादा, परंपराओं और रिवायतों को कायम रखने की जिम्मेदारी थी, उन्हीं ने सिख सिद्धांतों को आघात पहुंचाया और मर्यादा की धज्जियां उड़ायीं। अकाली नेतृत्व की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करना किसी भी जत्थेदार की मजबूरी रही हो, पर समय के साथ उन्होंने बादल परिवार की कमियों और गलतियों को उजागर कर सच सामने रखा है। उन्होंने कहा कि दो दिसंबर के फैसलों ने जत्थेदार की पदवी की गरिमा को बहाल करने और सिखों में जत्थेदारों के प्रति विश्वास को पुनर्जीवित करने का कार्य किया है। ऐसे में सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के हेड ग्रंथी के रूप में सेवा निभा रहे सिंह साहिब को नोटिस भेजना उनके पद और गरिमा का अपमान है। यदि कोई गलतफहमी थी तो शिरोमणि कमेटी को चाहिए था कि सिंह साहिब के साथ बैठकर बातचीत के माध्यम से मामला सुलझाया जाता, न कि नोटिस जारी कर संस्थाओं की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगाया जाता।
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