नयी दिल्ली , जुलाई 22 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि संघर्ष, असहिष्णुता और मतभेदों का सामना कर रही दुनिया में बातचीत, करुणा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में गांधीजी का विश्वास आज भी बेहद प्रासंगिक है।
उत्तरी मैसेडोनिया की यात्रा पर गयी श्रीमती मुर्मु ने वहां की राष्ट्रपति गोर्डाना सिलजानोव्स्का-दावकोवा के साथ बुधवार को स्कोप्जे शहर के संग्रहालय में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया।
इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए श्रीमती मुर्मु ने कहा कि महात्मा गांधी भारत के थे, लेकिन उनका संदेश पूरी मानवता के लिए है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके जीवन ने यह दिखाया कि सत्य और अहिंसा कमजोरी की निशानी नहीं हैं, बल्कि न्याय, सम्मान और स्वतंत्रता हासिल करने के शक्तिशाली साधन हैं। उन्होंने कहा," ऐसे समय में जब दुनिया संघर्ष, असहिष्णुता और बंटवारे का सामना कर रही है, बातचीत, करुणा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में गांधीजी का विश्वास बहुत प्रासंगिक बना हुआ है। यह लोगों को नफरत छोड़ने, मतभेदों को शांति से सुलझाने और साहस एवं सहानुभूति के साथ समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।"श्रीमती मुर्मु ने कहा कि महात्मा गांधी की यह प्रतिमा भारत और उत्तरी मैसेडोनिया के बीच दोस्ती और शांति, सहिष्णुता एवं मानवता के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता के स्थायी प्रतीक के रूप में खड़ी रहेगी।
इस अवसर पर स्कोप्जे शहर के मेयर ओर्स ग्योर्गजिएव्स्की, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया, संसद सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा तथा विजय बघेल भी उपस्थित थे।
इससे पहले श्रीमती मुर्मु ने सुश्री सिलजानोव्स्का-दावकोवा के साथ स्कोप्जे में मदर टेरेसा स्मारक का दौरा किया। मदर टेरेसा का जन्म स्कोप्जे में हुआ था, जहां वह 1928 तक रहीं। बाद में, भारत आने से पहले वह आयरलैंड में 'सिस्टर्स ऑफ लोरेटो' में शामिल हो गयी। उन्हें असाधारण मानवीय कार्यों और निस्वार्थ सेवा के लिए 1980 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।
राष्ट्रपति गुरुवार को रोमानिया के बुखारेस्ट के लिए रवाना होंगी जो उनकी तीन देशों की यात्रा का आखिरी चरण है।
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