नयी दिल्ली , सितंबर 02 -- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि बाघ तथा अन्य जंगली जानवरों के संरक्षण की नींव मानव-प्रकृति के सामंजस्यपूर्ण सहअस्तित्व के माहौल एवं स्थानीय परंपरागत ज्ञान पर आधारित होनी चाहिए और इसे स्थानीय समुदायों की आजीविका, आय सृजन तथा सतत सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ा जाना चाहिए।

श्री यादव ने बुधवार को यहां 'बाघ बहुल क्षेत्र : संरक्षण, जैव-अर्थव्यवस्था और आजीविका एवं आय सृजन के लिए पारिस्थितिकी पर्यटन' विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि बाघों का अस्तित्व जंगलों, घास के मैदानों, नदियों, शिकार के लिए प्रजातियों, वन्यजीव गलियारों और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बाघ बहुल क्षेत्र महत्वपूर्ण प्राकृतिक पूंजी हैं, जो जल सुरक्षा, कार्बन अवशोषण, जलवायु नियमन, जैव विविधता संरक्षण और आजीविका जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करते हैं। बाघों को बचाने को केवल एक प्रजाति के संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय समेकित क्षेत्रीय प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है, जिससे पारिस्थितिकी सुरक्षा के साथ सामाजिक-आर्थिक विकास भी सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने प्रकृति आधारित समाधानों, नवीन वित्तपोषण तंत्र और समुदाय आधारित पारिस्थितिकी पर्यटन के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि भूमि का संरक्षण गुणवत्तापूर्ण खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है, जो मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक है। दुनिया मरुस्थलीकरण, मिट्टी की नमी में कमी और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे में बाघ बहुल क्षेत्रों की रक्षा स्थानीय परंपरागत ज्ञान के उपयोग के साथ सतत सामाजिक-आर्थिक विकास का माध्यम बन सकती है।

उन्होंने कार्यशाला के प्रतिभागियों से संरक्षण, जैव-अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी पर्यटन से जुड़ी नीतियों में स्थानीय परंपरागत ज्ञान को शामिल करने का आह्वान करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) को वैश्विक दक्षिण के देशों के स्थानीय ज्ञान को एक मंच पर लाकर पारिस्थितिक संरक्षण की नीतियां तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के तहत आईबीसीए सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम करने वाले देशों और संस्थानों के बीच सहयोग के वैश्विक मंच के रूप में भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर आईबीसीए और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने क्षेत्रीय संरक्षण, सतत विकास, क्षमता निर्माण, ज्ञान के आदान-प्रदान और प्रकृति के अनुकूल वित्तपोषण पहलों में सहयोग मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। एडीबी की भारत में कंट्री डायरेक्टर मिया ओका ने कहा कि भारत के पास पारिस्थितिक संरक्षण और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास का व्यापक अनुभव है, जिसे बड़ी बिल्ली प्रजातियों वाले देशों के साथ साझा किया जा सकता है।

बाघ संरक्षण को लेकर आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में बंगलादेश, भूटान, कंबोडिया, मलेशिया, नेपाल और वियतनाम के विशेषज्ञों एवं सरकारी प्रतिनिधियों के अलावा पर्यावरण मंत्रालय, राज्य वन विभागों, बाघ अभयारण्यों, शोधकर्ताओं और संरक्षण विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में संरक्षण, जैव-अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी पर्यटन के माध्यम से स्थानीय आजीविका, आय सृजन और दीर्घकालिक पारिस्थितिक सुरक्षा को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

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