अमृतसर , अक्टूबर 29 -- पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना के फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, अमृतसर की ओरसे गुरुवार को बागों में पराली के उपयोग और नाशपाती की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम नाशपाती एस्टेट, वेरका में आयोजित किया गया।
इसमें विशेषज्ञों ने बागवानों को पराली से मल्चिंग, पौधों की देखभाल और फलों की गुणवत्ता सुधारने की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। पीएयू की वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक (फल) डॉ. स्वरीत खैरा ने बागों में पराली से मल्चिंग के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने पौधों की कटाई-छंटाई, खरपतवार नियंत्रण तथा खाद और पानी के उचित प्रबंधन संबंधी सुझाव भी दिए। जिला प्रसार विशेषज्ञ (प्रमुख) डॉ. नरेंद्रपाल सिंह ने बागवानों को फलों के बेहतर विपणन और खेती का रिकॉर्ड व्यवस्थितरखने के लिए प्रेरित किया। डॉ. गुरमीत सिंह ने फलदार पौधों को प्रभावित करने वाले कीटों और बीमारियों की रोकथाम के उपाय बताए।
कार्यक्रम में बागवानी विभाग के विशेषज्ञ सुखपाल सिंह और तेजबीर सिंह ने नाशपाती की खेती का रकबा बढ़ाने, फलों की गुणवत्ता सुधारने तथा विभागीय योजनाओं और सब्सिडी का लाभ उठाने की जानकारी दी। उन्होंने नए बाग लगाने और पुराने बागों के पुनरुद्धार के लिए उपलब्ध योजनाओं के बारे में भी बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र, अमृतसर के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. बिक्रमजीत सिंह गिल ने किसानों को पीएयू की सिफारिशों के अनुसार नाशपाती की खेती करने की सलाह दी। उन्होंने अंतरफसली खेती, फलों की सही समय पर तुड़ाई और उचितपैकिंग के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
तकनीकी सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान सुझाए। इस मौके पर विश्वविद्यालय की पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य बागवानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ना, पराली के उचित उपयोग को बढ़ावा देना और नाशपाती की गुणवत्तापूर्ण पैदावार के जरिए उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित करना था।
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