नैनीताल , जून 17 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बागेश्वर जिले की खड़िया खदानों के मामले में केंद्र सरकार से राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) को लेकर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में बुधवार को बागेश्वर की खड़िया खदानों को लेकर सुनवाई हुई। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की ओर से कहा गया कि बागेश्वर की 38 खड़िया खदानों की ओर से दावे प्रस्तुत किए गए हैं।

पीसीबी की ओर से इन दावों की जांच की गई तो पाया कि इनमें से 22 इकाइयों की संचालन करने की अनुमति खत्म हो गई है। इनमें से 08 ने आवेदन किया है। बाकी इकाइयों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है।

यह भी कहा गया कि 15 जून से बारिश का सीजन शुरू हो गया है और इसके चलते 15 सितंबर तक खड़िया खनन का कार्य शुरू नहीं हो सकता है। आगे कहा गया कि इन खदानों के पास केन्द्र सरकार की ओर से मिलने वाली पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) भी नहीं है।

पर्यावरणीय मंजूरी केन्द्र सरकार की ओर से गठित सिया की ओर से दी जाती है और उत्तराखंड में सिया का कार्यकाल खत्म हो चुका है। सिया का गठन अभी तक नहीं किया गया है। इसके बिना खदानों का संचालन नहीं किया जा सकता है।

अंत में खंडपीठ ने केंद्र सरकार से उत्तराखंड में सिया के गठन के संबंध में निर्णय लेने और उसके संबंध में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अदालत इस मामले में अगस्त के दूसरे सप्ताह में सुनवाई करेगी।

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