नयी दिल्ली , जून 24 -- संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसदों की मान्यता और सदस्यता से जुड़े मामलों पर फैसला होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी पक्षों की दलीलें सुन ली हैं और अब कानूनी तथा संवैधानिक विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। बताया जाता है कि अंतिम निर्णय से पहले केंद्रीय विधि मंत्रालय की राय भी प्राप्त की जाएगी ताकि किसी न्यायिक चुनौती की स्थिति में फैसला कानूनी कसौटी पर खरा उतर सके।
तृणमूल ने पार्टी से अलग हुए 20 सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए अध्यक्ष को याचिका सौंपी है। दूसरी ओर, शिवसेना (उबाठा) के नेताओं ने भी लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छह बागी सांसदों को अलग गुट के रूप में मान्यता नहीं देने का अनुरोध किया है।
उल्लेखनीय है कि शिवसेना (उबाठा) के छह लोकसभा सांसद हाल ही में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गये थे। वहीं तृणमूल के बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का निर्णय लिया है। सूत्रों का कहना है कि इन मामलों में मानसून सत्र शुरू होने से पहले निर्णय लिया जा सकता है।
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