कोलकाता , जुलाई 18 -- तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को पार्टी के बागी नेताओं को बड़ा प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जिम्मेदार ठहराकर तृणमूल छोड़ने वाले सांसद और विधायक पार्टी में वापस लौट आते हैं तो वे एक घंटे के भीतर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे देंगे।
21 जुलाई को होने वाली पार्टी की 'शहीद दिवस' रैली से पहले संवाददाताओं से बातचीत करते हुए श्री बनर्जी ने कहा कि जो लोग तृणमूल से नेताओं के पलायन के लिए उन्हें जिम्मेदार बता रहे हैं, वे दोबारा पार्टी में शामिल होकर अपने दावों को साबित करें।
सुश्री ममता बनर्जी के सामने यह प्रस्ताव रखते हुए उन्होंने कहा, "अगर वे सभी लोग जो यह कहते हैं कि उन्होंने मेरे कारण पार्टी छोड़ी, वापस आने को तैयार हैं, तो मैं एक घंटे के भीतर इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं। वे दोपहर तीन बजे वापस आएं और मैं शाम चार बजे तक अपने पद से हट जाऊंगा।"श्री अभिषेक बनर्जी का यह बयान पूर्व तृणमूल मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के सिलसिलेवार इस्तीफों के बीच आया है, जिनमें से कई नेताओं ने पार्टी के भीतर जारी आंतरिक संकट के लिए सार्वजनिक रूप से श्री बनर्जी की कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया था।
इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए श्री बनर्जी ने दावा किया कि कई दल-बदलू नेताओं ने केवल केंद्रीय एजेंसियों की जांच से बचने के लिए पाला बदला है। उन्होंने कहा, "अगर केंद्रीय एजेंसी का एक अदना-सा समन आपको पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर देता है, तो यह सिर्फ यही साबित करता है कि आप डरे हुए हैं और लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। मुझे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कई बार समन भेजा है। मैंने सीआईडी और राज्य पुलिस की पूछताछ का भी सामना किया है और मेरे खिलाफ 20-30 प्राथमिकियां दर्ज हैं, लेकिन मैं कभी भागा नहीं।" उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों से राहत पाने के लिए उनकी आलोचना करना तय 'पटकथा' का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने दावा किया, "ईडी, सीबीआई या पुलिस को खुश करने के लिए अभिषेक बनर्जी को गाली देना सौदा बन गया है। जिन लोगों पर कई आरोप लगे हैं, वे अपने नये राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए बेताब हैं।"श्री बनर्जी ने अपने राजनीतिक रिकॉर्ड का बचाव करते हुए तर्क दिया कि अगर उन्हें पार्टी की विफलताओं के लिए दोषी ठहराया जा रहा है, तो फिर उन्हें इसकी सफलताओं का श्रेय भी मिलना चाहिए। आमतला में पार्टी कार्यालय को ढहाये जाने के मुद्दे पर बोलते हुए श्री बनर्जी ने चेतावनी दी कि भविष्य में सरकार बदलने पर यही कानूनी सिद्धांत भाजपा के कार्यालयों पर भी लागू किये जा सकते हैं। उन्होंने कहा, "जो लोग इस तोड़फोड़ का जश्न मना रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अगर बंगाल में सरकार बदलती है, तो यही कानून और यही प्रावधान भाजपा के पार्टी कार्यालयों पर भी लागू होंगे। अगर इसी पैमाने का इस्तेमाल किया गया, तो भाजपा का एक भी कार्यालय अछूता नहीं रहेगा।"श्री बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तोड़फोड़ के दौरान भाजपा कार्यकर्ता भगवा झंडे लेकर परिसर में दाखिल हुए और कार्यालय में तोड़फोड़ की। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के पास इस घटना के वीडियो और डिजिटल सबूत हैं और इसके खिलाफ तृणमूल कलकत्ता उच्च न्यायालय और जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेगी।
दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि यह तोड़फोड़ पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत की गयी है। अधिकारियों ने बताया कि इस कथित अवैध ढांचे के संबंध में दो बार नोटिस तामिल कराये गये थे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
प्रशासन ने दावा किया कि जिस जमीन पर यह कार्यालय खड़ा था, उसे 'लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड' के नाम पर खरीदा गया था और रिकॉर्ड में श्री बनर्जी के पिता श्री अमित बनर्जी का नाम दर्ज है।
नोटिस का पालन न करने के कारण शनिवार को इस विध्वंस की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
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