बेंगलुरु , फरवरी 20 -- कर्नाटक के बागलकोट में शिवाजी जयंती शोभायात्रा के दौरान हुई पत्थरबाजी की घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है और राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर "माय ब्रदर्स पॉलिसी" अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह नीति कथित तौर पर अल्पसंख्यकों को तुष्ट करने वाली है।
विधान परिषद में विपक्ष के मुख्य सचेतक एन रविकुमार ने आरोप लगाया कि जब बागलकोट में शिवाजी महाराज का चित्र लेकर शोभायात्रा एक मस्जिद के पास से गुजर रही थी, तभी प्रतिभागियों पर पथराव किया गया। घटना में पुलिस अधीक्षक के सिर पर चोट आई, जबकि दो कांस्टेबल भी घायल हुए। उन्होंने दावा किया कि पत्थरों के साथ चप्पल और जूते भी फेंके गए और हिंदू कार्यकर्ताओं के दबाव के बाद ही गिरफ्तारियां की गईं।
श्री रविकुमार ने इस घटना को "तुष्टिकरण की राजनीति" का परिणाम बताते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंचों पर "मेरे भाई" शब्द का प्रयोग नीति पक्षपात को दर्शाता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या हिंदू उनके भाई नहीं हैं और क्या सरकार की अल्पसंख्यक पहुंच नीति में हिंदू समुदाय को समान संरक्षण नहीं मिल रहा।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों मांड्या, शिवमोग्गा और मंगलुरु में बार-बार हो रहे साम्प्रदायिक तनाव कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का संकेत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन चयनात्मक कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने विधान सौध के भीतर कथित तौर पर लगे 'पाकिस्तान समर्थक' नारों के पुराने विवाद का भी जिक्र करते हुए कहा कि यदि उस समय सख्त कार्रवाई होती तो बाद की घटनाएं रोकी जा सकती थीं।
श्री रविकुमार ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कर्नाटक में शिवाजी जयंती मनाना विवादास्पद हो गया है। उन्होंने गणपति उत्सव सहित अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक शोभायात्राओं के दौरान कथित प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए सभी समुदायों के लिए समान व्यवहार की मांग की।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने सरकार पर प्रशासनिक विफलताओं का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य संचालित अस्पतालों की स्थिति बिगड़ गई है और कई जिलों में भुगतान लंबित होने के कारण स्कैनिंग सुविधाएं ठप पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने डायग्नोस्टिक सेवाओं के लिए 140 करोड़ रुपये जारी नहीं किए, जिससे एमआरआई जांच प्रभावित हुई है, जबकि मुख्यमंत्री स्वयं वित्त विभाग भी संभाल रहे हैं।
श्री अशोका ने यह भी आरोप लगाया कि जन औषधि केंद्रों की संख्या घटाई गई है और दवाओं की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। उन्होंने विधान सौधा में मीडिया प्रतिनिधियों पर लगाए गए प्रतिबंधों की भी निंदा की और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रेस पर अंकुश नकारात्मक संदेश देता है।
विपक्ष ने राज्य सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और निष्पक्ष शासन सुनिश्चित करने की मांग की है। सत्तारूढ़ कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित