बागपत , अप्रैल 18 -- विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में आयोजित पहली "हेरिटेज ट्रेल" ने ऐतिहासिक पहल का रूप लेते हुए स्थानीय विरासत, संस्कृति और जनभागीदारी का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। बड़ौत नगर स्थित जनता वैदिक कॉलेज परिसर में बड़ी संख्या में लोगों ने इस आयोजन में भाग लेकर जिले की सांस्कृतिक धरोहर को करीब से देखा और महसूस किया। जिले में पहली बार आयोजित "बागपत हेरिटेज ट्रेल" ने विरासत संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया। सुबह से ही जनता वैदिक कॉलेज परिसर में युवा, विद्यार्थी, बुजुर्ग और परिवारों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रतिभागियों में अपनी जड़ों को जानने और स्थानीय इतिहास को समझने का उत्साह दिखाई दिया।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में जिला प्रशासन और सेंटर फॉर हिस्टोरिक हाउसेज ऑफ इंडिया की संयुक्त पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम को प्रशासनिक नवाचार और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिलाधिकारी स्वयं पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की निगरानी करती रहीं।
शनिवार सुबह शुरू हुई यह हेरिटेज ट्रेल दिनभर एक जीवंत सांस्कृतिक यात्रा में बदल गई। कॉलेज परिसर में पिएत्रा ड्यूरा, ब्लॉक प्रिंटिंग, पॉटरी और परफ्यूम निर्माण जैसी पारंपरिक कलाओं की कार्यशालाएं आयोजित की गईं। मिट्टी की खुशबू, रंगों की छटा और इत्र की सुगंध ने वातावरण को विरासतमय बना दिया। बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भारतीय शास्त्रीय संगीत कार्यशाला ने आयोजन में विशेष आकर्षण जोड़ा।
ट्रेल के दौरान मिट्टी कला, पत्थर डिजाइन, हैंडलूम उत्पाद, इत्र निर्माण और संगीत का जीवंत प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों ने केवल इन कलाओं को देखा ही नहीं, बल्कि उनमें सहभागिता कर अनुभव भी प्राप्त किया। यह ट्रेल जनता वैदिक कॉलेज से शुरू होकर डाक बंगले होते हुए खुर्शीद मंजिल तक पहुंची। हर पड़ाव पर प्रतिभागियों को संबंधित स्थल के इतिहास, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और वास्तु महत्व की जानकारी दी गई, जिससे यह आयोजन केवल भ्रमण न रहकर ज्ञानवर्धक अनुभव बन गया।
खुर्शीद मंजिल, शिकवा हवेली, बामनोली की हवेलियां और पुरा महादेव मंदिर जैसे स्थलों ने बागपत की समृद्ध विरासत को रेखांकित किया। आयोजन के दौरान युवा अपने कैमरों में इतिहास को कैद करते नजर आए, जबकि बुजुर्गों ने अपनी स्मृतियां साझा कीं।
हेरिटेज ट्रेल के माध्यम से स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को मंच मिला, जिससे उनकी कला और उत्पादों को पहचान मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए। प्रशासन का मानना है कि यह पहल बागपत को उभरते पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है। "विकास भी, विरासत भी" की अवधारणा को साकार करते हुए इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और जनसहभागिता से विकास की नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।
कार्यक्रम में सेंटर फॉर हिस्टोरिक हाउसेज ऑफ इंडिया की निदेशक डॉ. एस्थर श्मिट, जनता वैदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह, प्रोफेसर डॉ. गीता, जन उदय फाउंडेशन के भानु प्रताप सिंह, नितिन तोमर, शास्त्रीय संगीतज्ञ राम पंचाल तथा अन्य विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
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